हवालात की हवा खा चुके मृत्युंजय मिश्रा पर क्यों मेहरबान है सरकार?

मंत्री हरक सिंह और सीएम धामी भी मामले को लेकर साधे हुए हैं चुप्पी
जीरो टाॅलरेंस की सरकार के फैसले की हो रही किरकिरी

देहरादून: उत्तराखंड में अफसरशाही इस कदर हावी है कि जेल की हवा खा चुके उत्तराखंड आयुर्वेद विवि के कुलसचिव डाॅ. मृत्युंजय मिश्रा कुछ दिन पहले उसी पद पर बहाल कर दिए गए। उत्तराखंड शासन ने उन पर लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें फिर से उसी पद पर तैनाती दे दी जिस पद पर रहते हुए विश्वविद्यालय में की गई वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप में 3 दिसंबर 2018 को उन्हें गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद पिछले साल अगस्त 2021 में मृत्युंजय मिश्रा जमानत पर रिहा हुए थे।

गौरतलब यह भी है कि मृत्युंजय मिश्रा मामले में एक भी बार मंत्री हरक सिंह रावत का भी कोई बयान सामने नहीं आया है। जीरो टाॅलरेंस की बात करने वाली भाजपा सरकार की कथनी और करनी में ऐसे में बड़ा फर्क नजर आता है। चुनाव से चंद दिन पहले मृत्युंजय मिश्रा की बहाली से विश्वविद्यालय के कुलपति ने उन्हें कोई भी फाइल देने से इंकार कर दिया है वहीं अब मिश्रा को वापस मूल विभाग उच्च शिक्षा में भेजे जाने की चर्चाएं भी जोरों पर है। इससे पूर्व त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार और पूर्व मुख्य सचिव ओम प्रकाश के कार्यकाल में मृत्युंजय मिश्रा की आयुर्वेद विवि में तूती बोलती थी। बाद में कई आरोप लगने के बाद मिश्रा ने कई दिन तक सलाखों के पीछे सजा भी काटी। कहीं न कहीं उत्तराखंड शासन में बैठे अफसरों ने तोड़-मरोड़ कर उन्हें आरोपों से बरी कर दिया। तीन दिन बीत जाने के बाद भी विभागीय मंत्री से लेकर सीएम तक इस मामले में कुछ भी कहने से बच रहे हैं।

अक्सर विवादों में रहने वाले प्रदेश के मंत्री हरक सिंह रावत इस मामले को लेकर भी चर्चाओं में है। आखिर हरक सिंह की मामले को लेकर चुप्पी क्या दर्शा रही है। साथ ही प्रदेश के युवा सीएम धामी भी भ्रष्टाचार के कारण हवालात की हवा खा चुके अफसर को वापस उसी जगह तैनाती देकर आखिर प्रदेश की जनता को क्या संदेश देना चाहते हैं? यह कहीं न कहीं जीरो टाॅलरेंस की बात करने वाली भाजपा की डबल इंजन सरकार की असलीयत बयां कर रही है।

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