बागेश्वर (संवाददाता- मनोज टंगडिया): कुमाऊं में खड़िया खनन का गढ़ कहे जाने वाले जनपद बागेश्वर में जिला प्रशासन ग्रामीण स्तर के भूमि संबंधी विवाद निपटा पाने में विफल साबित होता दिख रहा हैं। ताजा मामला  बागेश्वर क्षेत्र के अन्तर्गत आने वाले गांव पगना, खोला, बेहरगांव, और लोब के ग्रामीण क्षेत्रों से सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि राहुल टम्टा नामक व्यक्ति द्वारा खड़िया खनन हेतु फर्जी तरीके से जमीनों के अनापत्ति प्रमाणपत्र बना कर ग्रामीणों की काश्तकारी पुसतेनी भूमि पर नाजायज कब्जा किया जा रहा हैं। इसका हम विरोध करते है। हमारे द्वारा गांव में खड़िया खनन चलाने हेतु पूर्व में ही मनोज टम्टा और सुन्दर सोनियाल को अनापत्ति प्रमाणपत्र पत्र दिये जा चुके हैं। लेकिन बागेश्वर का प्रशासन खड़िया खनन के पट्टे, सत्ता से नजदीकी रखने वाले राहुल टम्टा को दिए जा रहे है। धूराफाट के ग्रामीणों के अन्दर प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर गंभीर रोष व्याप्त हो गया है। ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार से फ़रियाद लगाते हुए, इस मामले में दखल देकर राहुल टम्टा द्वारा बागेश्वर जिला प्रशासन को प्रेषित की गई फर्जी अनापत्ति प्रमाणपत्रों की जांच करने की मांग कि गई हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि एसडीएम बागेश्वर द्वारा क्षेत्र का दौरा किया गया, जिसमें हमारे द्वारा न्याय की मांग कि गई हैं। खड़िया खनन के लिए ग्रामीणों से सुन्दर सुनिवाल और मनोज टम्टा द्वारा जमीनों की अनापत्ति प्रमाणपत्र लिए गये हैं। राहुल टम्टा को किसी भी ग्रामीण द्वारा कोई अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी नहीं किया गया है। प्रशासन कि मिली भक्त से राहुल टम्टा को खनन की स्वीकृति दी हैं, जिसका हम पूरा जोर विरोध करते हैं।

ग्रामीण से खड़िया खनन के लिए प्राप्त अनापत्ति प्रमाण-पत्रों के साथ मौजूद मनोज टम्टा और सुन्दर सुनिवाल का कहना हैं कि खनन के लिए ग्रामीणों से स्वीकृत हमें मिलीं है। लेकिन जिला प्रशासन बागेश्वर राहुल टम्टा नामक व्यक्ति के पक्ष में खनन पट्टे की स्वीकृति कर रहा हैं। जो सरासर गलत है। राहुल टम्टा द्वारा ग्रामीणों की जमीनों के फर्जी अनापत्ति प्रमाण-पत्र बनाये है। जिसकी जांच कि जाए, शासन से हम गुहार लगाते हैं। 

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