चमोली (संवाददाता- पुष्कर सिंह नेगी): यूं तो चमोली जिले की कर्णप्रयाग विधानसभा सीट पर भाजपा और कांग्रेस में विधानसभा चुनाव के उम्मीदवारों की लंबी कतारों के कारण प्रत्याशी घोषित करने में अभी भी माथापच्ची

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का दौर बना हुआ है। इन सबके बीच कम संसाधनों के बाबजूद निरंतर जनता की पैरवी करने के दम पर यहां वामपंथी दलों ने अपने संयुक्त प्रत्याशी के रूप में भाकपा माले के तेजतर्रार और जन आंदोलनों में मुखरता से अपनी मजबूत भागीदारी करने वाले गढ़वाल यूनिवर्सिटी के पूर्व अध्यक्ष इंद्रेश मैखुरी को मैदान में उतारा है।

इंद्रेश मैखुरी इससे पहले 2017 के विधानसभा चुनावों में कर्णप्रयाग से वामपंथ के प्रत्याशी रहे थे और जनता के बीच उनकी लोकप्रियता के कारण बड़े दलों को उन्होंने नाकों चने चबवा दिए थे। हालांकि इंद्रेश मैखुरी जीत हासिल नहीं कर सके परंतु उस समय चुनावी नतीजे घोषित होने के बाद यहां के लोगों ने सोशल मीडिया में इनके विधानसभा न पहुंचने का दुख भी प्रकट किया था।

कामरेड इंद्रेश मैखुरी की जनता के बीच बहुत अच्छी छवि है और वह हर समय लोगों के लिए उपलब्ध रहते हुए उनके सुख-दुख में अपनी भूमिका निभाते हैं। उन्होंने अपने पूरे जीवन में जनसंघर्षों के लिए काम किया है। स्थानीय लोग कहते हैं कि यदि इंद्रेश मैखुरी चाहते तो आज किसी बड़े प्रशासनिक पदों पर आसीन रहते लेकिन उन्होंने जनता के लिए संघर्ष का रास्ता चुना और कहते हैं कि अगर इंद्रेश मैखुरी किसी बड़े दल में शामिल हुए होते तो वह कबके संसद और विधानसभा में लोगों का प्रतिनिधित्व करते हुए नजर आ जाते। उनके इस संघर्ष मय जीवन के कारण एक बड़ा वर्ग हमेशा चाहता है कि वे विधानसभा और संसद में उनका प्रतिनिधित्व करते हुए नजर आएं। अब देखने की बात होगी कि इस बार जब इंद्रेश मैखुरी चुनाव मैदान में उतर रहे हैं तो जनता पिछली बार की गलतियों को सुधारने में क्या कुछ नया करती है।

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