सवा लाख फर्जी वोट डलवाने के बावजूद भी इंदिरा बहुगुणा को नहीं हरा पाई

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इस चुनाव में इंदिरा मुझे जीतने नहीं देगी और गढ़वाल मुझे हराने नहीं देगा – हेमवती नंदन बहुगुणा के इस एक वाक्य ने पुर गढ़वाल को जातिवाद भुलाकर उनके समर्थन मे एकजुट कर दिया था. और उनके खिलाफ इंदिरा गाँधी ने १ लाख २५ हज़ार फर्जी वोट डलवाए, फिर भी गढ़वाल ने उन्हे 28 हज़ार वोटों से जीता दिया. आइए पोलिटिकल स्टोरी के एस एपिसोड मे आपको ये पूरा वाक़या बताते हैं.

इस चुनाव में सत्ता का दुरूपयोग, पुलिस की बर्बरता और सत्ता का संघर्ष भी खूब देखने को मिला. हम बात कर रहे हैं 1981 में गढ़वाल लोकसभा सीट में हुए उप चुनाव की. पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हेमवती नंदन बहुगुणा के बीच रहे अनबन को कौन नहीं जानता है. हेमवती नंदन बहुगुणा ने कई बार इंदिरा गांधी की नीतियों पर सवाल खड़े किये. ऐसा ही कुछ देखने को मिला 1980 में 1980 में हुए लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस सत्ता में आई और इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बनी, लेकिन हेमवती नंदन बहुगुणा से चल रही अनबन के कारण इंदिरा गांधी ने बहुगुणा जी को अपने मंत्रीमंडल में जगह नहीं दी. इससे पहले बहुगुणा जी 1971 में केंद्रीय मंत्रीमंडल में संचार राज्य मंत्री, 1977 में केंद्रीय पेट्रालियम, रसायन और उर्वरक मंत्री रहे. इसके अलावा 1979 में केंद्रीय वित्त मंत्री भी रहे. 1980 मे मंत्रिमंडल मे जगह नही मिली तो नैतिकता के आधार पर हेमवती बहुगुणा ने सांसद पद के साथ कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया.

ऐसे में गढ़वाल लोकसभा सीट खाली हो गई और फिर 1981 में गढ़वाल लोकसभा सीट पर उपचुनाव घोषित हुआ. इस उप चुनाव के रण में हेमवती नंदन बहुगुणा भी कूद गये. जब बहुगुणा जी ने चुनाव लड़ने की ठानी तो बहुगुणा जी से बदला लेने के लिए और उन्हें हराने के लिए इंदिरा गांधी ने भी जी जान लगा दी. इंदिरा गांधी ने बहुगुणा जी के खिलाफ चंद्र मोहन सिंह नेगी को कांग्रेस का प्रत्याशी बनाया. अब यहीं से शुरू हुआ सत्ता का दुरूपयोग. गढ़वाल लोकसभा सीट में उत्तर प्रदेश पुलिस के अलावा हरियाणा, पंजाब सहित अर्ध सैनिक बलों को यहां तैनात कर दिया. इंदिरा गांधी ने चुनाव को अपना नाक का सवाल बना दिया था ये कहा जाए है कि पहाड़ में इसी चुनाव में ठाकुर- ब्राह्मण वाद का बीज भी बोया गया.

सवा लाख फर्जी वोट डलवाने के बावजूद भी इंदिरा बहुगुणा को नहीं हरा पाई

वरिष्ठ पत्रकार और इतिहासकार योगेश धस्माणा जी बताते हैं कि इस उपचुनाव में पहली बार कोई प्रधानमंत्री किसी उपचुनाव के प्रचार में उतरा था. इंदिरा गांधी ने गढ़वाल लोकसभा सीट में एक दो नहीं 38 जनसभाएं की. ये भी बताया जाता है कि देहरादून परेड ग्राउंड में हेमवती नंदन बहुगुणा की जनसभा सुनने के लिए इंदिरा गांधी भेष बदलकर उनका भाषण सुनने पहुंची थी. जहां एक ओर इंदिरा गांधी ने पूरी जान झोंकी हुई थी वहीं बहुगुणा जी के समर्थन में भी कई दिग्गज गढ़वाल पहुंचे. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी, पटना की सांसद तारकेश्वरी सिन्हा, 1977 में रायबरेली से इंदिरा गांधी को हराने वाले राजनारायण, सीपीआई के इंद्रजीत गुप्त और गोरखपुर के सांसद हरिकेश बहादुर, बहुगुणा जी को समर्थन दे रहे थे. अब मतदान वाले दिन सत्ता का पूरा खेल खेला गया, एक ओर जमकर बूथ कैप्चरिंग हुई तो दूसरी ओर हरियाणा पुलिस बर्बरता देखने को मिली. वरिष्ठ पत्रकार और इतिहासकार योगेश धस्माणा बताते हैं कि वे उस घटना के खुद प्रत्यक्षदर्शी थे. उन्होंने बताया की पौड़ी के बस स्टेशन पर हरियाणा पुलिस ने जमकर लाठीचार्ज किया, दुकानों को लूटा, क्या महिलाएं क्या बुजुर्ग किसी को नहीं छोड़ा. चुनाव सम्पन्न कर लौट रहे मतदान कर्मियों को भी नहीं छोड़ा. इन मतदान कर्मियों ने अपने बैलेट बॉक्स वहीं छोड़कर भागकर अपनी जान बचाई. इस घटना से पूरा गढ़वाल क्षेत्र डर गया था. लेकिन कुछ लोग थे जिन्होंने सत्ता के दुरूपयोग के खिलाफ आवाज उठाई. हेमवती नंदन बहुगुणा ने पौड़ी में अपने चुनाव की जिम्मेदारी रायबरेली के सांसद हरिकेश बहादुर को सौंपी हुई थी. हरिकेश बहादुर ने हरियाणा पुलिस की ज्यादतियों को देखकर गढ़वाल डीएम का घेराव कर दिया. बीपी पांडे तब गढ़वाल डीएम थे. हरिकेश बहादुर के दवाब बनाने के बाद डीएम बीपी पांडे ने बताया कि उन्हें नहीं पता कि हरियाणा पुलिस आई कहां से,  फिर क्या था डीएम पर दबाव और बढ़ गया और डीएम बीपी पांडे को मुख्य चुनाव आयुक्त को रिपोर्ट भेजनी पड़ी.

इसके साथ ही यूपी में शिक्षा मंत्री रहे शिवानंद नौटियाल ने भी कहा कि उनकी कर्णप्रयाग विधानसभा में बूथ कैप्चरिंग हुई है. इसके बाद कर्णप्रयाग विधानसभा के 38 बूथ के पीठाशीन अधिकारियों ने भी लिखित में जिला निर्वाचन अधिकारी को बूथ कैप्चरिंग की शिकायत की, लेकिन तत्कालीन  मुख्य चुनाव आयुक्त श्यामलाल सकधर ने जिला निर्वाचन अधिकारी की रिपोर्ट, जिसमें सिर्फ यह लिखा हुआ था कि उन्हें नहीं पता की यहां हरियाणा पुलिस कहां से आई, किसने भेजी और क्यों नियुक्त की पर ही 1981 का गढ़वाल लोकसभा उपचुनाव रद्द कर दिया. 1982 मे फिर गढ़वाल सीट पर उपचुनाव घोषित हुआ. फिर हेमवती नंदन बहुगुणा और कांग्रेस से चंद्र मोहन सिंह नेगी आमने- सामने थे, लेकिन यहां भी इंदिरा गांधी कहां मानने वाली थी. वे हेमवती नंदन बहुगुणा को हराने के लिए कुछ भी करने को तैयार थी. इस बार इंदिरा गांधी यहां चुनाव प्रचार में नहीं आई. लेकिन इंदिरा ने चुनाव प्रचार के लिए हरियाणा, पंजाब और मध्य प्रदेश सहित 6 राज्यों के मुख्यमंत्री यहां झोंक दिए, साथ ही पूरा केंद्रीय मंत्रीमंडल भी यहां तैनात कर दिया.

देश की राजनीति में हेमवती नंदन बहुगुणा को बहुत चतुर राजनीतिज्ञ माना जाता था. अंत में हेमवती नंदन बहुगुणा ने अपने तुरूप का एक्का निकाला और वो चल दिया. मतदान से पहले पौड़ी के रामलीला मैदान में हुई जनसभा में हेमवती नंदन बहुगुणा ने हरियाणा पुलिस की ज्यादतियों को लेकर जनता से माफी मांगी. उन्होंने कहा कि कहा कि उनकी गलती है कि वे यहां चुनाव लड़ने आये, अगर वे चुनाव नहीं लड़ते तो जनता साथ ऐसी घटना नहीं घटती. उन्होंने जनसभा में उनके साथ मंच साझा कर रहे गढ़वाल लोकसभा सीट के पूर्व सांसद प्रताप सिंह नेगी और पौड़ी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष शंकर सिंह नेगी की ओर ईशारा करते हुए कहा कि इन्होंने मुझ पर चुनाव लड़ने का दबाव बनाया और कहा कि अगर आप चुनाव नहीं लड़ते हैं तो वे मेरे घर के आगे भूख हड़ताल पर बैठ जायेंगे. ऐसे में बहुगुणा जी ने पूरी जनता को अपने पक्ष में कर लिया लेकिन उनका आखिरी वाक्य जो था उस पर पूरा गढ़वाल एक हो गया. उन्होंने अपने भाषण के अंत में कहा कि इस चुनाव में इंदिरा मुझे जीतने नहीं देगी और गढ़वाल मुझे हराने नहीं देगा. फिर क्या था बहुगुणा जी पक्ष में जनता एक हो गई और जातिवाद को भूलकर 28 हजार वोटों से बहुगुणा जी को जीता दिया.

वरिष्ठ पत्रकार और इतिहासकार योगेश धस्माणा बतातें है कि कांग्रेस की इस हार के बाद कांग्रेस के नेता संजय सिंह ने, जिन्हें फर्जी वोट डालने की जिम्मेदारी दी गई थी उन्होंने कहा कि उन्होंने पूरी सीट पर एक लाख 25 हजार फर्जी वोट डलवाये फिर भी हार गये. इसका मतलब यहां कांग्रेस प्रत्याशी का कोई जनाधार नहीं हैं और बहुगुणा जी को गढ़वाल ने हारने नहीं दिया.