Indian Army: डिसेबल ऑफिसर। भारतीय सेना के जांबाज ऑफिसर।

Indian Army: डिसेबल ऑफिसर

इसका हमें अफसोस है कि अपने देश पर न्योछावर करने को हमारे पास सिर्फ एक ही जीवन है। ये एक आम आदमी नही बल्की हमारे देश के उन वीर जवानो का कहना है जो सरहदों में चट्टान की तरह अडिग रहते है। हमारे शो “ज़रा याद करो कुरबानी” में आज आपको बतांएगें उस योद्धा के बारे में जिसने मुश्किल परिस्थिती में खुद अपने हाथ से अपना एक पैर काट डाला और भारतीय सेना का पहला डिसेबल ऑफिसर बना। आपको बतांएगे इनके बारे में कई रोचक बाते मगर उससे पेहले अगर आपने हमारे चैनल को subscribe नही किया है तो जल्दी से करलें। क्यूंकी हमारे देश के वीरों के शौर्य को जानना देश के हर नागरिक के लिए बेहद ज़रूरी है।

16 दिसंबर 1971 वो एतिहासिक दिन है जब भारतीय सेना ने अपनी वीरता से दुनिया का नक्शा ही बदल डाला. ये वो जीत है जिसे सैन्य इतिहास में भारतीयों की वीरता और बहादुरी को याद करने के लिए पढ़ाया जाता है. कैसे मात्र 13 दिन के युद्ध में पाकिस्तान ने भारत के सामने घुटने टेक दिए और पाकिस्तान की सेना पर सबसे बड़ा सरेंडर का दाग लगा जिससे वो कभी भी पीछा नहीं छुड़ा पाएगा.  इस युद्ध के नतीजे ने दक्षिण एशिया के नक्शे को हमेशा हमेशा के लिए बदल दिया जिसमें पाकिस्तान के दो टुकड़े हो गए और विश्व के नक्शे में बांग्लादेश नाम के राष्ट्र का उदय हुआ। रणभूमि में अनगिनत भारतीय सैनिकों ने एसा पराक्रम दिखाया की दुश्मनों की छुट्टी हो गई।

Indian Army: डिसेबल ऑफिसर ” मेजर जनरल इयान कारदोजो “

ऐसे ही एक ऑफिसर थे मेजर जनरल इयान कारदोजो। इयान कारदोजो पांचवीं गोरखा राइफल्स के मेजर जनरल थे। 1971 की भारत-पाक जंग के दौरान एक वाक्य ऐसा आया जब मेजर जनरल इयान कारदोजो को खुद ही अपना पैर काटना पड़ा।

मेजर जनरल इयान कारदोजो ने एक इंटरव्यू में रोंगटे खड़े कर देने वाले उस युद्ध का आंखों देखा अनुभव साझा किया। मेजर जनरल इयान कारदोजो ने बताया कि 1971 के युद्ध की बात है। उस समय के पूर्वी पाकिस्तान यानी कि आज के बांग्लादेश में हेली की लड़ाई चल रही थी। भारत की सेना तत्कालीन पाकिस्तान की सीमा के अंदर थी। इंडियन आर्मी पाकिस्तानियों को शिकस्त देने के करीब पहुंच चुकी थी। 

मेजर जनरल इयान कारदोजो की गोरखा राइफल्स सिलहट में युद्ध लड़ रही थी, जबकि कारदोजो डिफेंस सर्विस कॉलेज वेलिंग्टन में ट्रेनिंग ले रहे थे। युद्ध के दौरान इस बटालियन के सेकेंड कमांडिंग ऑफिसर वीरगति को प्राप्त हो गए. इसके बाद मेजर जनरल इयान कारदोजो को उनका स्थान लेने के लिए भेजा गया। 

लड़ाई अपनी चरम सीमा पर थी। एक ऑपरेशन के दौरान मेजर जनरल इयान कारदोजो का पैर लैंडमाइन पर पड़ा और तेज धमाका हुआ। कुछ क्षण के लिए उनका दिमाग सुन्न हो गया और आंखो के आगे अंधेरा छा गया। थोड़ी देर बाद जब उन्हें होश आया तो उन्होंने देखा की उनका पांव बुरी तरह से जख्मी था। मेजर जनरल इयान कारदोजो ने इस घटना का वर्णन इस तरह से किया था, “एक स्थानीय निवासी ने मुझे देखा और मुझे उठा कर पाकिस्तानियों के बटालियन मुख्यालय ले गया। वहां मैंने डॉक्टर से कहा कि मुझे मॉरफीन दे दीजिए, लेकिन उनके पास शायद मॉरफीन भी नहीं थी” मेजर जनरल इयान कारदोजो ने कहा कि वे गोरखा राइफल्स में थे तो उनके पास खुखरी रहा करती थी। खुखरी लगभग एक फीट लंबी साथ ही उसकी तेज कटार होती है। इयान कारदोजो ने अपने साथ मौजूद एक दूसरे गोरखा जवान से कहा कि वह उनका पैर काट दे, लेकिन वह गोरखा सैनिक इससे इनकार कर गया। इसके बाद मेजर जनरल इयान कारदोजो ने जो किया वो अभी तक सबके ज़हन में बैठ गया। उन्होंने अपनी ही खुखरी से अपने पैर को काट डाला. इसके बाद एक पाकिस्तानी डॉक्टर मेजर मोहम्मद बशीर ने उनका ऑपरेशन किया। मेजर जनरल इयान कारदोजो कहते हैं कि उस समय विचित्र स्थिति पैदा हो गई जब मुझे खून की जरूरत पड़ी।  इयान कारदोजो ने बताया कि उन्होंने उस समय कहा की चाहे जो हो जाए पाकिस्तानी का खून नहीं लूंगा। इन सब के बीच किसी तरह से उनका ऑपरेशन किया गया.  इसके बाद अस्पताल में उनका उचित इलाज किया गया। वो बताते हैं कि अब भी मेरे नाम से बांग्लादेश में एक फुट बाय एक फुट की जमीन है जहां वो कटी हुई टांग दबाई गई थी।

मेजर जनरल इयान कारदोजो कहते हैं कि आगे चलकर वे पहले ऐसे अधिकारी बने जिनकी टांग नहीं थी बावजूद इसके उन्होंने ब्रिगेड का नेतृत्व किया। तत्कालीन चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल तपीश्वर नारायण रैना ने उन्हें ब्रिगेड को लीड करने की इजाजत दी।

Indian Army: डिसेबल ऑफिसर बटालियन में कारतूस के नाम से जाने जाते थे

मेजर जनरल इयान कारदोजो को बटालियन में लोग कारतूस साहब कहकर पुकारते थे, क्योंकि उन्हें उनके नाम का उच्चारण करने में मुश्किल होती थी। 

कारतूस की तरह ही ये वीर योद्धा दुश्मनों पर एसा फूटा कि हज़ारों दुश्मनों को घुटने टेकने पर मजबूर होना पड़ा।

ऐसे जाबाज़ योद्धा को देवभूमी न्यूज़ करता है नमन।

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