बोल्डर और मलबा आने से चीन सीमा को जोड़ने वाला मलारी एनएच बंद, यमुनोत्री हाईवे भी बंद; कुमाऊं मंडल में भी हल्की बारिश ने मचाई तबाही

देहरादून (आशीष डोभाल):  हल्की बारिश के बाद ही उत्तराखंड के पहाड़ों में बाढ़ जैसे हालात हो रहे हैं। कहीं नेशनल हाईवे का हिस्सा गायब हो रहा है तो कहीं नेशनल हाईवे पर बड़े-बड़े पत्थर और बोल्डर आकर आवाजाही बाधित कर रहे हैं। अभी तो प्रदेश में मानसून की शुरूआत भी नहीं हुई है। मई माह में यह हालात हैं तो बरसात के दिनों क्या मंजर देखने को मिलेगा यह अंदाजा लगाना मुश्किल होने के साथ ही काफी डरा देने वाला भी है।

आज गुरुवार सुबह चीन सीमा को जोड़ने वाला मलारी राष्ट्रीय राजमार्ग बड़े-बड़े बोल्डर, मलबा और पत्थर आने के कारण बंद हो गया है। इससे भारत चीन सीमा पर तैनात सेना और आईटीबीपी की आवाजाही भी बंद हो गई है। अंतर्राष्ट्रीय सीमा के इस राजमार्ग के बंद होने से आस-पास के दर्जनों गांव का भी जनपद और अन्य इलाकों से संपर्क कट गया। देर शाम तक इस मार्ग के खुलने की संभावना है। एक दिन पहले ही जगह-जगह आए आंधी-तूफान और बारिश के बाद हालात जगह-जगह खतरनाक हो गए थे। कुमाऊं मंडल के कई इलाकों में ऐसे ऐसे छोटे गदेरों में बाढ़ जैसे हालात हो गए जिससे एक मोटर मार्ग का काफी बड़ा हिस्सा और तीन पुलिस भी बह गई थी। इसके अलावा जगह-जगह तूफान से पेड़ भी गिर गए। इसके साथ ही बागेश्वर में सड़क पर मलबा और पत्थर आने से आवाजाही बाधित रही। इकसे अलावा यमुनोत्री धाम से पहले रानाचट्टी में हाईवे का करीब 15 मीटर हिस्सा धंस गया यहां से बड़ी बसें और वाहन नहीं आ-जा पा रहे हैं। इससे 4000 से ज्यादा यात्री जगह-जगह फंसे हुए हैं। युद्ध स्तर पर यहां से मार्ग को ठीक किया जा रहा है। यात्रियों को जगह-जगह पर रोका गया और उनके खाने-पीने की जिला प्रशासन की ओर से व्यवस्था करवाई जा रही है।

उत्तराखंड में हल्की बारिश के बाद ही जगह-जगह भू-धंसाव कई लंबे चैड़े हाईवे बाधित हो रहे हैं। इससे जहां प्रदेश में पीक पर चल रही चारधाम यात्रा में बाधा आ रही है। इससे स्थानीय लोगों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। एक दिन पूर्व हल्की बारिश के बाद देर शाम 6ः00 बजे के आसपास राणाचट्टी के पास भू-धंसाव के कारण एनएच 94 का काफी बड़ा हिस्सा गायब हो गया था। इसके अलावा आज गुरुवार सुबह चीन सीमा को जोड़ने वाला मनारी राष्ट्रीय राजमार्ग भी मलबा और पत्थर आने के कारण बंद हो गया है। इससे भारत चीन सीमा पर तैनात सेना और आईटीबीपी की आवाजाही भी बाधित हो गई है। राजमार्ग बंद होने से दर्जनों गांव का भी चमोली जनपद और अन्य इलाकों से संपर्क कट गया है। देर शाम तक इस मार्ग के खुलने की संभावना है।

1 दिन पूर्व के कर्णप्रयाग के पास भी भारी बोल्डर और मलबा आने से हाईवे बाधित हो गया था। यहां से दुपहिया वाहनों को ही रवाना किया जा रहा था। इसके साथ कल तीन घंटे तक केदारनाथ-गौरीकुंड पैदल मार्ग का हिस्सा गायब होने से यात्रा बाधित रही। हालांकि बाद में यात्रा सुचारू कर दी गई।

विचारणीय पहलू यह है कि अभी तो बरसात की शुरुआत ही नहीं हुई है। अभी यह हालात उत्तराखंड में देखे जा रहे हैं। उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में भी जगह-जगह बारिश के बाद कई मार्ग और खेत भी बह गए हैं। बारिश के बाद शुरू हुई तबाही के बाद बाढ़ जैसे हालात हो गए थे। बारिश के बाद अल्मोड़ा जनपद के स्याल्दे में पत्थर खोला महर गांव मोटर मार्ग का काफी बड़ा हिस्सा गायब हो गया। इसके अलावा तीन पुलिया भी हल्की सी बारिश के बाद आए पानी के बहाव में तहस-नहस हो गई। इस दौरान लोगों को लगा कि भारी बारिश के बाद फिर से बादल तो नहीं फटा है। गांव के पास इन गदेरों में आज तक इतना पानी कभी नहीं देखा था। इतना की बागेश्वर के कफकोट इलाके में भी बारिश के बाद कई घंटे रोड पर मलबा आने के कारण यातायात प्रभावित रहा।