मिथकों से रहें दूर, गठिया और इन रोगों पर जानें क्या है डाॅक्टर्स की सलाह

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विश्व एंकेलोसिंग दिवस व विश्व ल्यूपस दिवस पर इंडियन रह्यूमेटोलोजी एसोसिएशन (उत्तराखंड ब्रांच) ने लोगों को किया जागरूक

देहरादून (अरुण सैनी): हिमालयन अस्पताल जॉलीग्रांट के वरिष्ठ गठिया व जोड़ रोग विशेषज्ञ डॉ योगेश प्रीत सिंह ने बताया कि एंकेलोसिंग स्पॉन्डिलाइटिस एक प्रकार की गठिया है जिसमें रीढ़ की हड्डी में समस्या हो जाती है जिसकी वजह से मरीज को चलने फिरने में दिक्कत होती है व रीड की हड्डी आपस में जुड़ जाती है सही समय पर इसका उपचार न होने पर आगे इसकी वजह से आंखों में समस्या भी हो सकती है।

एम्स ऋषिकेश के गठिया रोग विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ वेंकटेश एस पाई ने बताया कि लुपस एक प्रकार की गठिया संबंधित बीमारी है जिसमें चेहरे पर लाल चकत्ते पड़ जाते हैं वह इसका सही समय पर उपचार ना होने की वजह से शरीर के दूसरे अंगों पर प्रभाव पड़ सकता है। मैक्स अस्पताल के गठिया रोग विशेषज्ञ डॉ. सौम्य जैन ने भी गठिया के बारे में जानकारी दी।

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देहरादून के वरिष्ठ गठिया रोग विशेषज्ञ डॉ कमल भट्ट ने बताया कि पहले यह सोचा जाता था कि गठिया एक दुर्लभ बीमारी है और मुख्य रूप से बुजुर्ग लोगों को प्रभावित करती है। इस विषय के बारे में बढ़ती मान्यता, वैज्ञानिक प्रगति और चिकित्सा अनुसंधान के साथ, अब हम जानते हैं कि गठिया एक अकेली बीमारी नहीं है और कई अलग-अलग प्रकार के गठिया हैं जो बच्चों और वयस्कों दोनों में हो सकते हैं और प्रारंभिक पहचान और सही निदान महत्वपूर्ण है ताकि समय पर उपचार किया जा सके। रुमेटोलॉजी और इम्यूनोलॉजी चिकित्सा की वह शाखा है जिसके अंतर्गत इन रोगों का अध्ययन किया जाता है। गठिया के बारे में एक और आम मिथक यह भी है कि इसका कोई इलाज नहीं है। चिकित्सा विज्ञान में तेजी से प्रगति और गठिया के विभिन्न रूपों के कारण, बुनियादी प्रतिरक्षा संबंधी विकारों के बारे में अधिक जागरूकता के साथ, अब बहुत विशिष्ट और प्रभावी उपचार उपलब्ध हैं जो न केवल रोग के लक्षणों में सुधार करते हैं बल्कि रोग की प्रगति को नियंत्रित करने में लंबे समय तक चलने वाले प्रभाव भी पैदा कर सकते हैं।

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उत्तराखंड राज्य को स्वास्थ्य सेवा में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है और आबादी का एक बड़ा हिस्सा अभी भी पहाड़ों में रह रहा है। इन बीमारियों के इलाज के लिए मरीजों को बड़े शहरों और कभी-कभी दिल्ली या चंडीगढ़ में बड़े अस्पतालों की यात्रा करनी पड़ती है। शुक्र है, पिछले दशक में, कुछ युवा रुमेटोलॉजिस्ट हैं जिन्होंने ऐसे रोगियों को सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में देखभाल और सेवाएं प्रदान करना शुरू कर दिया है। यह बहुत खुशी और राहत की बात है कि अब वे सभी उत्तराखंड रुमेटोलॉजी एसोसिएशन बनाने के लिए एक साथ आए हैं ताकि रोगियों और अन्य विशिष्टताओं के डाक्टरों को एक मंच मिल सके जिसमे रोगी कल्याण, नई इलाज पद्धतियों एवम सामाजिक समर्थन से संबंधित मामलों पर बातचीत और संवाद किया जा सके और इन सबसे बढ़कर इस क्षेत्र में लगातार बढ़ते ज्ञान को सभी हितधारकों तक पहुंचाया जा सके। उत्तराखंड रुमेटोलॉजी एसोसिएशन भी इस अवसर का उपयोग गठिया और अन्य संधि रोगों से पीड़ित रोगियों के लिए एक मजबूत आवाज बनाने के लिए करना चाहता है ताकि इसे मुख्यधारा की बातचीत का हिस्सा बनाया जा सके और इन मुद्दों के आसपास के कलंक और मिथकों को दूर किया जा सके।

मिथकों से रहें दूर, गठिया और इन रोगों पर जानें क्या है डाॅक्टर्स की सलाह