बिना नींव के हज़ारों साल पुराना ये मंदिर कैसे है आज भी खड़ा?

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Brihadeshwara Temple
Brihadeshwara Temple

Brihadeshwara Temple: कोई नहीं सुलझा पाया इस मंदिर के ग्रनाइट का राज़

Brihadeshwara Temple: भारत देश अपनी संस्कृति और यहां मौजूद मंदिरों के लिए विश्व भर में जाना जाता है। इन्हीं मंदिरों में से एक मंदिर ऐसा भी है जो अपने अंदर कई रहस्य समेटे हुए हैं। इन रहस्यों पर से आजतक कोई भी पर्दा नहीं उठा पाया है। जिस मंदिर (Brihadeshwara Temple) की हम बात कर रहे हैं उसे बिना नींव रखे बनाया गया है। आज हजारों साल बाद भी ये मंदिर वैसे का वैसा ही खड़ा है। इस मंदिर पर कई आक्रमण किए गए लेकिन कोई भी इसे न ही नुकसान पहुंचा पाया और न ही ध्वस्त कर पाया।

ये मंदिर (Brihadeshwara Temple) भगवान शिव को समर्पित है जो तमिलनाडु के तंजौर में स्थित है। इस मंदिर का नाम पहले राजराजेश्वर था लेकिन बाद में इसका नाम बदलकर बृहदीश्वर मंदिर (Brihadeshwara Temple) रख दिया गया। 

दरअसल इस मंदिर को 1004 से 1009 ईस्वी के बीच राजाराज चोल प्रथम द्वारा बनवाया गया था और इनके द्वारा इस मंदिर को नाम दिया गया राजराजेश्वर मंदिर, लेकिन फिर बाद में जब मराठा शासकों द्वारा इस मंदिर पर आक्रमण किया गया तो इस मंदिर के नाम को बदलकर बृहदेश्वर मंदिर (Brihadeshwara Temple) रख दिया गया।

ये मंदिर वास्तुकला का एक अद्भुत नमूना है, जिसे देखने देश के अलग अलग कोनों से यहां लोग आते हैं। इस मंदिर के चारों ओर सूरज घूमता है लेकिन हैरान कर देने वाली बात तो ये हैं कि इस मंदिर (Brihadeshwara Temple) के गुंबद की परछाई जमीन पर कहीं भी नहीं पड़ती।

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ये मंदिर 13 मंजिल ऊंचा है जिसे पत्थरों से बनाया गया है, इसकी ऊंचाई की बात की जाए तो ये 66 मीटर ऊंचा मंदिर (Brihadeshwara Temple) है जिसे बनाने में करीबन 1 लाख 30 हजार टन से भी ज्यादा ग्रेनाइट के पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है।

हैरान कर देने वाली बात तो ये है कि तंजौर के 100 किलोमीटर के दायरे में न तो कोई पहाड़ हैं और न ही पत्थरों की चट्टानें, तो फिर कैसे इस पूरे मंदिर (Brihadeshwara Temple) को ग्रेनाइट के पत्थरों से बनाया गया होगा, कहां से इन पत्थरों को लाया गया होगा और इससे भी बड़ा सवाल कि कैसे इन पत्थरों को यहां तक लाया गया होगा।

ऐसा कहा जाता है कि मंदिर (Brihadeshwara Temple) को बनाने के लिए इन पत्थरों को 3000 से भी ज्यादा हाथियों की मदद से यहां तक लाया गया था, लेकिन इसका आजतक कोई भी पुख्ता सुबूत नहीं मिल पाया है। वहीं इस भव्य मंदिर (Brihadeshwara Temple) को बनाने के लिए इन पत्थरों को अलग तकनीक से जोड़ा गया है। इन्हें जोड़ने के लिए न ही किसी सरिये, न ही प्लास्टर और न ही सीमेंट का इस्तेमाल किया गया है बल्की पजल तकनीक से इसे आपस में जोड़ा गया है।

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इस मंदिर (Brihadeshwara Temple) की मजबूती का इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि बिना किसी बुनियाद और सरिए के भी ये मंदिर आज हज़ारों सालों बाद भी वैसे का वैसा ही खड़ा है। इस मंदिर के गुंबद की बात की जाए तो इस अकेले गुंबद का ही वजन 80 टन से भी ज्यादा है। जिस समय पर आधूनिक मशीने नहीं हुआ करती थी सोचिए ज़रा उस समय पर इस भारी भरकम पत्थर के गुंबद को मंदिर (Brihadeshwara Temple) के सबसे ऊपर कैसे रखा गया होगा।

आप जैसे ही इस मंदिर (Brihadeshwara Temple) में प्रवेश करेंगे आपको एक भव्य शिवलिंग के दर्शन होंगे जो 13 फीट ऊंचा शिवलिंग है। साथ ही मंदिर के बाहर एक चबूतरे पर विशालकाय नंदी जी भी विराजमान हैं।

बगैर नींव के बनाए गए इस भव्य मंदिर (Brihadeshwara Temple) को 1987 में यूनेस्कों द्वारा विश्व धरोहर घोषित किया गया। इस मंदिर को देख हर कोई हैरान है कि आखिर कैसे ये भव्य मंदिर बिना नींव के भी आजतक खड़ा है, स्थानीय लोगों का मानना है कि यह मंदिर (Brihadeshwara Temple) आजतक भगवान शिव की कृपा से ही खड़ा है और इसी कारण इसे आजतक कोई आंच नहीं आ पाई है।

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