उत्तराखंड में मौत झूल रही पुल में, 12 वर्षों से क्षतिग्रस्त झूला पुल से गिरने पर एक की मौत

Bridge Of Death

Uttarakhand News: Bridge Of Death: गुजरात के मोरबी में झूला पुल टूटने से जो मौतें हुई हैं उनके कई कारण हो सकते हैं। लेकिन उत्तराखंड में जो झूला पुल मौत का कारण बन रहे हैं उनका जिम्मेदार कौन? विभागीय लापरवाही जान पर भारी पड़ रहे है। ऐसा ही कुछ देखने को मिला पौड़ी के सतपुली में, जहां 12 वर्ष से क्षतिग्रस्त पुल में एक बुजुर्ग के गिरने से मौत हो गई।

Bridge Of Death: 12 वर्षों से नहीं हुई पुल की मरम्मत

Bridge Of Death

पौड़ी, सतपुली के बड़ोखोलू में बड़खोलू गांव और सतपुली को जोड़ने के लिए एक झूला पुल बना हुआ है। लगभग दो हजार की आबादी को जोड़ने वाला यह पुल 18 सितंबर 2010 को पूर्वी और पश्चिमी नयार में आई बाढ़ के कारण क्षतिग्रस्त हो गया था। यह पुल पिछले 12 वर्षों से क्षतिग्रस्त हो रखा है। स्थिति यह हो चुकी है कि यहां पैदल चलना भी मुश्किल हो रखा है। स्कूली बच्चों से लेकर बड़े- बुजुर्ग इस झूला पुल (Bridge Of Death) में जान हथेली में रखकर चलते हैं।

12 वर्षों से न पुल की मरम्मत हुई और ना ही इसके बदले को दूसरा पुल बनने की योजना। यही कारण है कि मंगलवार को सतीश चंद्र नाम के बुजुर्ग की झूला पुल से गिरने पर मौत हो गई।

Bridge Of Death: तीन मुख्यमंत्रियों कर चुके हैं पुल बनाने की घोषणा

पुल

यह बात जानकर आप भी हैरान हो जायेंगे कि तीन- तीन मुख्यमंत्रियों की घोषणा के बाद यहां एक पुल नहीं बन पाया है। सबसे पहले बीसी खंडूरी ने मुख्यमंत्री रहते हुए यहां बड़खोलू मोटर पुल की घोषणा की थी। उसके बाद हरीश रावत ने भी मुख्यमंत्री रहते हुए इस घोषणा को दोहराया। इस क्षेत्र से जुड़े पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपने कार्यकाल में सार्वजनिक तौर पर इस पुल के निर्माण की घोषणा की थी। लेकिन यहां तो इस पुल से मौतों की संख्या बढ़ाने का इंतजार होता दिख रहा है।

विश्व बैंक की सहायता से यहां पुल का निर्माण होना है। इसके लिए टोकन मनी भी दे दी गई है। लेकिन शुरू में कुछ ग्रामीणों ने पुल के लिए जमीन देने के लिए मना कर दिया था। लेकिन बाद में वार्ता के बाद उन्हें मुआवजा भी दे दिया गया है। अधिकारी तो बस जल्द पुल के निर्माण की ही बात करते हैं।

Bridge Of Death: रुड़की गंगनहर में बने पुल की स्थिति भी दयनीय

Bridge Of Death

रुड़की में गंगनहर के ऊपर लोहे का पुल की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। इस लोके के पुल पर जंग लगा हुआ है, 1955 में इस पुल के दोनों और तार लगाये गये लेकिन पुल की हालत काफी जर्जर हो चुकी है। यह पुल (Bridge Of Death) अब किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है। पास में ही सिंचाई विभाग का कार्यालय है और कई बड़े राजनेताओं का इस पुल के आस-पास घर है लेकिन इस ओर किसी की नजर नहीं जाती है।

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