Friday, August 19, 2022
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26/11 Mumbai Attacks: 13 साल बाद भी न्याय देने में बेइमान पाकिस्तान।

26/11  Mumbai Attacks के 13 साल बाद भी आज तक जान गवाने वाले लोगों के परीवार को नही मिला इनसाफ।

26/11 वो दिन है जिसकी विश्वभर में आज भी कड़ी निंदा की जाती है। मुंबई में हुए इस भयानक हमले को आज यानी 26 नवंबर 2021 को पूरे 13 साल हो गए हैं। आज ही के दिन पाकिस्तान में मौजूद जिहादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के 10 लोगों ने मुंबई के ताज होटल पर हमला किया था और 4 दिनों में 12 हमलों को अंजाम दिया था। ताजमहल पैलेस होटल, नरीमन हाउस, मेट्रो सिनेमा और छत्रपति शिवाजी टर्मिनस सहित अन्य स्थानों पर हुए हमलों में 15 देशों के 166 लोग मारे गए थे।

26/11  Mumbai Attacks की व्यापक वैश्विक निंदा

साल 2008 के नवंबर में हुए इस हमले के बाद ऐसा पहली बार हुआ था जब वैश्विक स्तर पर इतने बड़े पैमाने पर किसी हमले की इतनी निंदा की गई थी और इस हमले ने ही केंद्र सरकार को अपने आतंकवाद विरोधी अभियानों को गंभीर रूप से बढ़ाने और पाकिस्तान के साथ पहले से ही तनावपूर्ण संबंधों के कई पहलुओं की फिर से जांच करने के लिए प्रेरित किया।

सुरक्षा बलों द्वारा अजमल कसाब नाम के एक एकमात्र हमलावर को पकड़ा गया था जिसने बाद में पुष्टि की कि इस हमले की योजना की पूरी प्लानिंग लश्कर और पाकिस्तान में मौजूद दूसरे आतंकी संगठनों ने की थी। देश की खुफियां एंजेसियों ने कसाब के जरिए पता किया कि सभी हमलावर पाकिस्तान से आए थे और उन्हें कंट्रोल करने वाले लोग भी वहीं से काम कर रहे थे।

हमले के दस साल बाद, पाकिस्तान के पूर्व प्रधान मंत्री नवाज शरीफ ने सनसनीखेज खुलासे की एक सीरीज में यह भी संकेत दिया था कि इस्लामाबाद ने 2008 के मुंबई हमलों में एक अहम भूमिका निभाई थी। वर्तमान सबूत बताते हैं कि 26/11 के हमलों में पाकिस्तान के आतंकवादियों का हाथ था जिन्हें पाकिस्तान ही पालता-पोसता है। तीन आतंकवादियों से पूछताछ के दौरान इन सब चाज़ो की पुष्टी की गई थी इनके नाम थे- अजमल कसाब, डेविड हेडली और जबीउद्दीन अंसारी।

अपनी सार्वजनिक स्वीकृति के बाद भारत के सभी सबूत साझा करने के बाद भी पाकिस्तान ने 26/11 के हमलों की 13वीं बरसी पर भी पीड़ितों के परिवारों को न्याय दिलाने में अभी तक ईमानदारी नहीं दिखाई है। 7 नवंबर को, एक पाकिस्तानी अदालत ने छह आतंकवादियों को रिहा कर दिया इनमें वो आतंकी भी शामिल थे जिन्होंने भयानक हमलों को अंजाम दिया था। 

लश्कर-ए-तैयबा कमांडर और 2008 के मुंबई हमलों के सरगना जकी-उर-रहमान लखवी भी देश के पंजाब प्रांत के आतंकवाद-रोधी विभाग (सीटीडी) द्वारा आतंकवाद के वित्तपोषण के आरोप में गिरफ्तार होने के बाद 2015 से वो जमानत पर था। पाकिस्तान में आतंकवादी संगठन भी जांच से बचने और दावों का मुकाबला करने के लिए अपना नाम बदलते रहते हैं, क्योंकि संयुक्त राष्ट्र आतंकवाद विरोधी संगठन ने अपनी निगरानी और बढ़ा दी है।

इंटरनेशनल फोरम फॉर राइट्स एंड सिक्योरिटी के अनुसार, अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद के संदर्भ में, मुंबई हमला एक तरह से सशस्त्र और अच्छी तरह से प्रशिक्षित व्यक्तियों द्वारा उत्पन्न खतरे को रेखांकित करता है जो निहत्थे नागरिकों और सॉफ्ट टारगेट नागरिक आबादी पर एक अपरंपरागत हमला कर सकते हैं।

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