सिलसिलेवार बम धमाकों के दोषी आतंकी वलीउल्लाह को 16 साल बाद मिली फांसी की सजा

वाराणसी के वकीलों ने आतंकी का केस लड़ने से कर दिया था इनकार, गाजियाबाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश की कोर्ट ने आज सुनाई सजा

गाजियाबाद, ब्यूरो। 16 साल पहले सात मार्च 2006 उत्तर प्रदेश के वाराणसी में सिलसिलेवार बम धमाके दोषी आतंकी वलीउल्लाह को गाजियाबाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश की कोर्ट ने आज सोमवार को फांसी की सजा सुनाई है। एक दिन पहले ही कोर्ट ने इस आतंकी को वाराणसी सीरियल ब्लास्ट के मामले में दोषी करार दिया था। बता दें कि वाराणसी के सभी वकीलों ने इस आतंकी का केस लड़ने से इनकार कर दिया था जिसके बाद यह केस गाजियाबाद ट्रांसफर किया गया। उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के बाद 24 दिसंबर 2006 को यह गंभीर मामला सुनवाई के लिए गाजियाबाद ट्रांसफर किया गया। वलीउल्लाह प्रयागराज की फूलपुर स्थित नलकूप कालोनी का रहने वाला है। सिलसिलेवार धमाकों 16 लोगों की मौत हो गई थी जबकि करीब 76 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।

वाराणसी में वर्ष 2006 में हुए सिलसिलेवार बम धमाके के मामले में दोषी आतंकी वलीउल्लाह को जिला एवं सत्र न्यायाधीश जितेंद्र कुमार सिन्हा की अदालत ने सोमवार को फांसी की सजा सुनाई है। शनिवार को कोर्ट ने वलीउल्लाह को दोषी करार दिया था। वाराणसी में हुआ बम ब्लास्ट में 18 लोगों की मौत हुई थी और 50 लोग घायल हुए थे। सभी लोग इस चर्चित मामले में अदालत के फैसले का इंतजार कर रहे थे। लंका थाना क्षेत्र वाराणसी के संकटमोचन मंदिर पर सात मार्च 2006 को सायं 6ः15 बजे संकटमोचन मंदिर में पहला बम धमाका हुआ था। इस धमाके में सात लोगों की मौत और करीब 26 लोग गंभीर घायल हुए थे। इसके अलावा वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन पर प्रथम श्रेणी के विश्राम कक्ष के सामने हुए धमाके में नौ लोग मारे गए थे जबकि 50 लोग घायल हुए। इस धमाके के साक्ष्यों के अभाव में अदालत आतंकी वलीउल्लाह को बरी कर चुकी है।

गाजियाबाद के जिला शासकीय अधिवक्ता राजेश चंद शर्मा ने बताया कि सात मार्च 2006 को वाराणसी में सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। पहला धमाका सात मार्च की सायं 6.15 बजे वाराणसी के लंका थाना के संकटमोचन मंदिर में हुआ था। इस धमाके के बाद सात लोगों की मौत हो गई थी जबकि 26 गंभीर घायल हुए थे। उसी दिन 15 मिनट के बाद 6.30 बजे दशाश्वमेध घाट थाना क्षेत्र में जम्मू रेलवे फाटक की रेलिंग के पास कुकर बम मिला था। पुलिस की मुस्तैदी के चलते यहां विस्फोट होने से बचा गया था।

बता दें कि आज गाजियाबाद कचहरी में सुनवाई से पहले कड़े सुरक्षा इंतजामात किए गए थे। गाजियाबाद की कचहरी में तीन रास्तों से प्रवेश और निकासी की गई थी।। एक रास्ते से चेकिंग के बाद ही कचहरी में प्रवेश दिया जा रहा है। इस आतंकी वारदात से जुड़े वकीलों के अलावा किसी वकील को भी जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत की ओर एंट्री नहीं दी गई। बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वॉड भी मौके पर मौजूद है।