॥ Zara Yaad Karo Kurbani || मरणोपरांत आज भी ये जवान मांगते हैं ये चीज़ || DEVBHOOMI NEWS ||

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माना जाता है कि हर परंपरा के पीछे कोई न कोई दिलचस्प कहानी ज़रूर छिपी होती है। पहाड़ों में हर जगह ऐसी कहानियां सुनने को मिलती हैं जो हमें हैरान कर जाती हैं। हमारे शो “ज़रा याद करो कुरबानी” में आज आपको बतांएगें एक दिलचस्प परंपरा के बारे में। उससे पेहले अगर आपने हमारे चैनल को subscribe नही किया है तो जल्दी से करलें। क्यूंकी हमारे देश के वीरों के शौर्य को जानना देश के हर नागरिक के लिए बेहद ज़रूरी है।
उत्तराखंड में हर एक जगह की अपनी विशेषता है और हर जगह की अपनी एक अजब कहानी है। आज भी पहाड़ों में कई परंपराएं ऐसी हैं, जो आज भी निभाई जा रही हैं। ऐसी ही एक परंपरा का पालन उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के नेलांग घाटी पर ड्यूटी करने वाला हर एक जवान भी निभाता है। ये पंरपरा लोगों को एहसास कराती है कि हमारी सुरक्षा के लिए हमारे वीर सपूत कैसी तकलीफों से गुजर जाते हैं। नेलांग घाटी में भारत तिब्बत सीमा पुलिस और सेना की चौंकियां है। जिस वजह से देश के जवान यहां डयूटी पर तैनात रहते है। गर्मियों में तो यहां डूयटी करना उतना मुश्किल नहीं होता। जितना की सर्दियों मे है। सर्दियों में यहां पर भारी बर्फबारी होती है, जिससे आकर्षित होकर देश के अलग अलग कोनों से पर्यटक यहां छुट्टियां मनाने आते है और बर्फबारी का खूब आनंद उठाते हैं। मगर कुछ दिन बर्फीलें इलाके में रहने में भले ही आंनद आए लेकिन कोई उन जवानों से पूछे कि जब उन्हें प्यास लगती है तो पानी भी वो इसी बर्फ को पिघलाकर पीते है तो क्या यहां ड्यूटी करना आसान है। बिलकुल भी नही।
यहां पर निभाई जाने वाली ये पंरपरा भी इसी पानी से ही जुड़ी है। बात है साल 1994 (चौरानबे) की, सीमा पर FD रेजीमेंट के तीन सैनिक पीने को पानी की तलाश में भटकते हुए ग्लेशियर के नीचे दबकर देश के लिए शहीद हो गए । उन शहीदों के प्रति सेना और अर्द्धुसैनिक बलों के जवानों की आस्था देखिए कि आज भी सीमा पर आगे बढ़ने से पहले उनके स्मारक पर पानी से भरी बोतल रखना नहीं भूलते। 64(चौंसठ) FD रेजीमेंट के सैनिक हवलदार झूम प्रसाद गुरंग, नायक सुरेंद्र और दीन बहादुर गश्त कर रहे थे। नेलांग से दो किलोमीटर पहले धुमका में ये सैनिक पानी पीने के लिए एक ग्लेशियर के पास गए थे। जहां ग्लेशियर में डबने से ये देश के लिए शहीद हो गए।
इन शहीद सैनिकों की याद में धुमका के पास उनका मेमोरियल बनाया गया। नेलांग सीमा पर तैनात जवानों का दावा है कि शहीद सैनिक कई बार उनके सपने में आते हैं और पीने को पानी मांगते हैं। इसीलिए नेलांग घाटी में आते-जाते समय हर सैनिक और अफसर शहीद सैनिकों के मेमोरियल में पानी की बोतल भरकर रखता है। माना जाता है इस घटना के कुछ समय बाद जो – जो सैनिक यहां पर गश्त के लिए आए उन सभी के सपने में वो जवान आए और पानी मांगने लगे। जिसके बाद आइटीबीपी ने यहां पर उन जवानों का स्मारक बनाया।
हमारे देश के सैनिक किन किन परिस्थितियों में ड्यूटी करते हैं और देश को सुरक्षित रखते है इसका हम अंदाज़ा भी नही लगा सकते।
भारत के सभी वीर योद्धाओं को देवभूमी का नमन।

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