तो क्या 2022 में कांग्रेस की सरकार! गंगोत्री – बद्रीनाथ में कांग्रेस का पलड़ा भारी! Episode-04

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“उत्तराखण्ड 2022 रण और रणबांकुरे”
इस वीडियो मे आते हैं चौथे नंबर की विधानसभा सीट पर. केदारनाथ. गंगोत्री सीट की ही तरह इस सीट का भी इतिहास यही रहा है की जिस पार्टी का प्रत्याशी यहाँ से जीता, सरकार उसी पार्टी की बनी.
2002 मे कॉंग्रेस के डॉक्टर अनुसूया प्रसाद मैखुरी जीते यहाँ से, भाजपा के केदार सिंह फोनिया दूसरे स्थान पर रहे. आस पास कोई तीसरा प्रतिद्वंदी नहीं.
2007 मे भाजपा के केदार सिंह फोनिया जीत गये. इन चुनावों मे भी फोनिया और मैखुरी के अलावा कोई तीसरा दमदार प्रत्याशी नज़र नही आया इस सीट पर.

2008 मे विधानसभा सीटों के परिसीमन के चलते चमोली जिले से नन्द्प्रयग और पिंडर सीट हट गयी और थराली विधानसभा सीट अस्तित्व मे आई. इस प्रकार चमोली मे 4 विधानसभा सीटों के स्थान पर 3 सीटें ही रह गयी थी. बद्रीनाथ, कर्णप्रयाग और थाराली.

अब 2012 मे कॉंग्रेस के डॉक्टर अनुसूया प्रसाद मैखुरी चनाव लड़ने कर्णप्रयाग पहुँच गये. बद्रीनाथ मे कॉंग्रेस की तरफ से लड़े राजेंद्र सिंह भंडारी जो 2007 मे नन्द्प्रयग विधानसभा सीट से विधायक थे. मैखुरी और भंडारी दोनो ने इस चुनाव मे कॉंग्रेस को जीत दिलाई. इधर भाजपा ने इन चुनावों मे फोनिया की जगह प्रेम बल्लभ भट्ट पर दाँव खेला और हार गयी. भाजपा से टिकेट ना मिलने से नाराज़ फोनिया उत्तराखंड रक्षा मोर्चा से लड़े और तीसरे स्थान पर रहे.

उत्तराखंड रक्षा मोर्चा रिटाइर्ड लेफ्टिनेंट जनरल टी पी एस रावत ने 2012 मे बनाया था जो की पूरे प्रदेश मे मात्र 67 हज़ार के आस पास वोट ही बटोर पाया.

2017 का चुनाव भारतीय जनता पार्टी से महेंद्र प्रसाद भट्ट लड़े और जीते भी. महेंद्र भट्ट 2002 मे नन्द्प्रयग सीट से विधायक थे, 2007 मे भी नन्द्प्रयग सीट से लड़े थे और राजेंद्र सिंह भंडारी से हार गये थे. राजेंद्र सिंह भंडारी को 2017 के चुनाव मे महेंद्र भट् ने बद्रीनाथ सीट से लगभग साढ़े पाँच हज़ार वोटों से हराया.
भाजपा से नाराज़ केदार सिंह फोनिया के सुपुत्र और पूर्व आईएफएस विनोद फोनिया भी 2017 मे निर्दलीय लदे किंतु मात्र 2370 वोट ही बटोर पाए.

बताते चलें की नाराज़ केदार सिंह फोनिया की त्रिवेंद्र सिंह रावत एप्रिल 2019 मे घर वापसी करा चुके हैं. वर्तमान विधायक से क्षेत्र की जनता सार्वजनिक रूप से तीखे प्रश्न भी पूछ रही है जिसे विधायक जी विपक्ष की चाल बताकर खारिज कर रहे हैं. कॉंग्रेस के राजेंद्र भंडारी अपनी पकड़ काफ़ी मजबूत कर चुके हैं इस क्षेत्र मे साथ ही उनकी पत्नी चमोली से जिला पंचायत अध्यक्ष है. राजेंद्र खुद भी 2003 से लेकर 2007 तक जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुके हैं. इसमे कोई दोराय नज़र नही आती की इस सीट से राजेंद्र भंडारी को कॉंग्रेस का टिकेट 2022 मे मिलेगा और उनकी जीत की संभावनाएँ भी प्रबल है यहाँ से.

गंगोत्री से अगर विजयपाल सजवान कॉंग्रेस के वफ़ादार बने रहते हैं और बद्रीनाथ से राजेंद्र भंडारी एक बार फिर 2007 का इतिहास दोहरा देते हैं, तो इस दोनो सीटों से जुड़ी मान्यता के अनुसार राज्य मे 2022 मे कॉंग्रेस की सरकार बनना तय है. बाकी काल-चक्र अपनी गति से घूम रहा है. हमारी नज़र बनी रहेगी. देखते रहिएगा. बहुत बहुत धन्यवाद.

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