जानिए शिव केे सिर पर चंद्रमा का रहस्य | shiv ji ke sar par chand kaise aaya |

हिन्दू धर्म में सावन महीने को महादेव भगवान शंकर का महीना माना जाता है। चैत्र के पांचवे महीने को सावन का महीना कहा जाता है। कहा जाता है कि सावन साल का सबसे पवित्र महीना होता है। ऐसी मान्यता है कि इस माह का प्रत्येक दिन किसी भी देवी-देवता की आराधना करने के लिए सबसे उपयुक्त होता है, विशेष तौर पर इस माह में भगवान शिव, माता पार्वती और श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है। इस महीने के प्रत्येक सोमवार को भगवान शिव पर जल चढ़ाना शुभ और फलदायी माना जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर क्यों ‘चंद्र’ भगवान शिव के सिर पर विराजमान रहते हैं, अगर नहीं तो चलिए आज हम आपको इसका रहस्य बताते हैं।
दरअसल पौराणिक कथानुसार चंद्र, जो की खुद बहुत सुंदर थे, का विवाह दक्ष प्रजापति की 27 नक्षत्र कन्याओं के साथ हुआ था। दक्ष की 27 बेटियों में रोहिणी बहुत सुंदर थी, जिसके कारण सुंदरता प्रेमी चंद्र का उनके प्रति अधिक स्नेह था, जो बात बाकी बहनों को अच्छी नहीं लगती थी, इस कारण वो सभी दुखी रहती थीं, इन सब ने अपना कष्ट अपने पिता से कहा, जिसे सुनकर दक्ष का गुस्सा आ गया और उन्होंने चंद्रमा को क्षय रोग का श्राप दे दिया।

जिसके बाद चंद्रदेव क्षय रोग से ग्रसित हो गए और उनकी शक्ति धीर-धीरे खत्म होने लगी, वो दुखी हो गए, उनकी इस हालत को देखकर नारद जी ने उन्हें मृत्युंजय भगवान आशुतोष की आराधना करने को कहा, चंद्र देव ने उनकी इस बात को मान लिया और वो प्रभु की अराधना में जुट गए , जिसका असर हुआ और उन्हें भगवान शंकर को पुनर्जीवन का वरदान दे दिया और उन्हें अपने मस्तक पर धारण कर लिया, इसलिए कहा जाता है, कि जो लोग शारीरिक रुप से परेशान हों, उन्हें भगवान शिव की पूजा सोमवार को जरुर करनी चाहिए।

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