Friday, August 19, 2022
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इन योद्धाओं ने बिना बंदूक ही जीती ये लड़ाई ||DEVBHOOMI NEWS||

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युद्ध के मैदान में बिना किसी कवर के, साथ ही जटिल मौसम और उबड़ खाबड़ रस्तों में इन योद्धाओं ने भले ही बन्दूके न उठाई हो मगर ज़ख्मी जवानों के इलाज का बीड़ा ज़रूर उठाया। हमारे चैनल को सबस्क्राइब और इस वीडियो को शेयर ज़रूर कीजिएगा क्यूंकी हमारे देश के शूरवीरों और उनके शौर्य को जानना देश के हर नागरिक के लिए बेहद ज़रूरी है।
1999 में कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना के मेडिकल कोर ने सैनिकों को instant treatment देकर उनकी जान बचाने में एक अहम भूमिका निभाई।
तत्कालीन कप्तान कर्नल विजय कुमार, जिन्हें उस समय सेना पदक से भी सम्मानित किया गया वे श्रीनगर-लेह राजमार्ग के साथ ही एक दूसरी जगह पर भी एक इन्फैंट्री बटालियन के रेजिमेंटल मेडिकल ऑफिसर के रूप में तैनात थे। 8 मई 1999 को द्रास सेक्टर में पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़ने के लिए जब उन्हें एक संदेश मिला कि उनकी यूनिट युद्ध भूमि में जाने को तैयार रहे। तो बिना एक शण गवाए वे निकल पड़े।
एक अखबार को दिए इन्टरव्यू में तत्कालीन कैपटन कर्नल विजय कुमार ने बताया कि जब वे Alpha co. के साथ LOC की ओर बढ़ रहे थे, तो दुश्मनो की ओर से अचानक भारी गोलाबारी और तोपे चलने लगी।
अल्फा कंपनी के कई सैनिक गंभीर रूप से घायल हो गए और कई सैनिको के तो शरीर के अंग ही अलग हो गए इनमे से एक जवान सिपाही के दोनों हाथ कट गए और उसका बहुत खून बहने लगा। युद्ध अपनी चरम सीमा पर था। एसे में कैप्टेन कुमार और उनके नर्सिंग स्टाफ उस घायल जवान को एक चट्टान के पीछे ले गए ताकि वो दुश्मनों की गोलीबारी से बच सके। जैसे तैसे उन्होंने दोनों हाथों से बह रहे खून को Compression bandages का उपयोग कर रोक दिया।
बाद में, उन्होंने उस जवान को अन्य घायलों के साथ स्ट्रेचर की मदद से रोड तक पहुँचाया और वहाँ से एम्बुलेंस की मदद से उन्हें फॉरवर्ड सर्जिकल सेंटर (FSC) ले जाया गया। समय पर चिकित्सा देखभाल के साथ साथ घायल सैनिक की दृढ़ इच्छा के कारण उसे बचा लिया गया।
जिस तरह से कैप्टन विजय कुमार और उनकी मेडिकल टीम ने साहस दिखाते हुए युद्ध के दौरान, बिना किसी कवर के, ऊबड़-खाबड़ ऊंचाई वाले क्षेत्र के साथ ही, चुनौतीपूर्ण मौसम में दुश्मनों की गोलीबारी का सामना किया और घायल जवानों तक चिकित्सा सुविधा पहुंचाने का काम किया साथ ही हताहतों की संख्या में भी काबू पाया वो काबिले तारीफ था।
ऐसे अनसुने और अंजाने war heroes को देवभूमी का नमन ।

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