Mon. Mar 30th, 2020

गायत्री मंत्र के उच्चारण से होता है वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार

1 min read

देहरादून। डॉक्टर आचार्य सुशांत राज का कहना हैं की इस बार चैत्र नवरात्रों में विधिवत पूजन के साथ व्रत रखना एक जोखिम ही माना जा रहा है। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि कोरोना वायरस के खतरे के बीच देश में 21 दिनों का लॉकडाउन हो गया है। वहीं, संक्रमण से बचने के लिए सेल्फ आइसोलेशन के अलावा रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने को सबसे कारगर उपायों के तौर पर माना जा रहा है। ऐसे में व्रत के दौरान कुछ न खाना आपकी सेहत के लिए लिहाज से बिल्कुल भी अच्छा नहीं है। ऐसे में अगर आप मां दुर्गा प्रसन्न करने के लिए ऐसे कई काम कर सकते हैं, जिन्हें पौराणिक मान्यताओं में व्रत के बराबर फल देने वाला ही बताया गया है।  पौराणिक कहानियों में दान की महत्व को सबसे ऊपर रखा गया है। दान का महत्व उस वक्त और भी बढ़ जाता है जब देश में ऐसे हालात हो। ऐसे में अपनी जरूरत को पूरा करते हुए अगर आप किसी को अन्न, जल या कोई अन्य चीज देते हैं, तो यही मायनों में इसका तप व्रत से ज्यादा है। इंसान हो या जानवर किसी भी जीव को दान करना सबसे श्रेष्ठ कार्यों में से एक है।

प्रत्येक जीव को ईश्वर की संतान माना जाता है लेकिन जानवरों, पक्षियों पर भगवान की विशेष कृपा होती है क्योंकि वो इंसानों की तरह छल-कपट से दूर रहते हैं। ऐसे में हमें कोशिश करनी चाहिए कि मुश्किल की इस घड़ी में हम जानवरों की थोड़ी मदद करें। आमतौर पर हमारे घरों में बचे हुए खाने से ही उनका जीवन चलता है, ऐसे में आप प्रसाद के तौर पर खाना बनाते समय 1-2 रोटी उनके लिए निकालकर रख सकते हैं। बचे हुए खाने को किसी साफ जगह पर रखकर उनकी मदद की जा सकती है। संकट की इस घड़ी में छोटे-छोटे प्रयासों से मानवता का धर्म निभाएं।

दुनिया में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है, जिससे कभी कोई गलती न हुई हो। ऐसे में अगर आपसे भी कोई ऐसी गलती हो गई है जिसे आपने सुधारा नहीं है, तो आप मां दुर्गा से क्षमा मांगकर जीवन में आगे बढ़ सकते हैं। वहीं, गलती सुधारने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप उस व्यक्ति से माफी मांगे, जिसे आपने सबसे ज्यादा दुख पहुंचाया है। दूसरों को माफ करने के साथ माफी मांगना भी किसी पुण्य से कम नहीं माना जाता।

जीवन की आपा-धापी में अक्सर यह होता है कि हमें अपने परिवारजनों का आभार जताने का मौका नहीं मिल पाता। हमें बहुत छोटी-छोटी चीजों का भी आभार व्यक्त करना चाहिए। जैसे, अगर हमारी मां, बहन या घर का कोई अन्य सदस्य हमारे लिए रोजाना खाना बनाता या हमारी रोजाना की छोटी-छोटी चीजों का ख्याल रखता है, तो उसे इसके बदले धन्यवाद देना न भूलें। सेल्फ आइसोलेशन के इस समय में जीवन को समझने का भी हम सभी के पास बढ़िया मौका है।

गायत्री मंत्र का जाप करने से मन शांत ही नहीं होता बल्कि इसे मेडिटेशन करने के दौरान भी वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अच्छा माना जाता है। गायत्री मंत्र के उच्चारण से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। वहीं, आज के समय के हिसाब से पूजन विधि के लिए गायत्री मंत्र सबसे सटीक विकल्प है क्योंकि इसका जाप आप मन-मन में आंख बंद करके करते हैं। इसमें लोगों के संपर्क में आने का विकल्प भी नहीं होता। महामारी के समय को देखते हुए आपको नवरात्रि में इतना ख्याल रखना पड़ेगा। यकीन मानें, पौराणिक कथाओं और पुराणों में व्रत की तरह इन बातों का भी उतना ही महत्व है।

रामनवमी तक मां दूर्गा का पावन पर्व नवरात्रि मनाया जाएगा :-

विगत 25 मार्च से चैत्र नवरात्रि का आरंभ हो चुके है। चैत्र मास के शुक्लपक्ष की प्रतिपदा तिथि से प्रारंभ होकर रामनवमी तक मां दूर्गा का पावन पर्व नवरात्रि मनाया जाएगा। इन नौं दिनों में मां के नौं रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन दिनों उपवास का भी विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि में शक्ति के नौं रुपों की पूजा करने से सभी तरह की समस्याएं दूर हो जाती हैं और जीवन में सुख, शांति आ जाती है।

देवी भागवत के अनुसार देवी ही ब्रह्मा,विष्णु एवं महेश के रूप में सृष्टि का सृजन,पालन और संहार करती हैं। अर्थात यही सृजन,पालन और संहार करने वाली आद्या परमशक्ति हैं। ये ही पराशक्ति नवदुर्गा,दस महाविद्या हैं। ये ही नर और नारी हैं एवं ये ही माता,धाता तथा पितामह हैं। ये ही महाशक्ति परम ब्रह्म परमात्मा है। इनके विविध स्वरुप हैं जो अनेकों रूपों में विभिन्न लीलाएं करती हैं।भगवान महादेव के कहने पर रक्तबीज शुंभ-निशुंभ,मधु-कैटभ आदि दानवों का संहार करने के लिए माँ पार्वती ने असंख्य रूप धारण किए किंतु देवी के प्रमुख नौ रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्रि का प्रत्येक दिन देवी माँ के विशिष्ठ रूप को समर्पित होता है और हर स्वरुप की उपासना करने से अलग-अलग प्रकार के मनोरथ पूर्ण होते हैं। ग्रह अनुकूल हों तो आपको राज्य दे सकते हैं और प्रतिकूल हैं तो आपके राज्य का हरण भी कर सकते हैं। जीवन में चौमुखी विकास के लिए ग्रहों की अनुकूलता परमावश्यक है। जिन माँ पराम्बा दुर्गा जी की तपस्या करके ग्रहों को शक्तियां प्राप्त होती हैं यदि आप भी इस नवरात्रि में उन्हीं माँ पर ग्रहों एवं उनकी राशियों के अनुसार पुष्प से पूजन अर्चन करें तो आपके ऊपर ग्रहों की अनुकूलता और भी बढ़ जायेगी। सभी राशियों के लिए अलग-अलग रंग-पुष्प बताए गए हैं, नवरात्र में माँ दुर्गा की पूजा अपने ग्रहों एवं राशि के अनुसार बताए गए पुष्पों से करके आप अपने सभी मनोरथ पूर्ण कर सकते हैं।

माँ दुर्गा की आराधना में सभी राशियों के लिए कमल, गुडहल, गुलाब, एवं कनेर प्रजातियों के सभी पुष्प शुभ माने गए हैं। इन पुष्पों के द्वारा का पूजन करना माँ की प्रसन्नता के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। सभी 12 राशियों के जातक अपनी-अपनी राशि स्वामी के अनुसार भी माँ का पूजन-अर्चन करके स्वामी ग्रहों की अनुकूलता में वृद्धि कर सकते हैं।

मेष राशि- गुड़हल, गुलाब, लाल कनेर, लाल कमल अथवा किसी भी तरह के लाल पुष्प हों उससे पूजा करके मां भगवती को प्रसन्न कर मंगल जनित दोषों के कुप्रभाव से बचा जा सकता है।

वृषभ राशि- श्वेत कमल, गुडहल, श्वेत कनेर, सदाबहार, बेला, हरसिंगार आदि जितने भी श्वेत प्रजाति के पुष्प हैं उनसे माँ की आराधना कर प्रसन्न किया जा सकता है ऐसा कर पाने से शुक्र की शुभता में वृद्धि होगी।

मिथुन राशि- मां की पूजा पीला कनेर, गुडहल, द्रोणपुष्पी, गेंदा और केवड़ा पुष्प से माँ की आराधना करके अभीष्ट कार्य सिद्ध भी कर सकते हैं और बुध की कृपा भी प्राप्त होगी।

कर्क राशि- श्वेत कमल, श्वेत कनेर, गेंदा, गुडहल, सदाबहार, चमेली रातरानी और अन्य जितने भी प्रकार के श्वेत और गुलाबी पुष्प हैं उन्हीं से माँ की आराधना करके प्रसन्न करके चन्द्र जनित दोषों से मुक्त हुआ जा सकता है।

सिंह राशि- किसी भी तरह के पुष्प से कमल, गुलाब, कनेर, गुड़हल से माँ की पूजा करके कृपा पा सकते हैं, गुड़हल का पुष्प सूर्य और माँ दुर्गा को अति प्रिय है।

कन्या राशि- गुड़हल, गुलाब, गेंदा, हरसिंगार एवं किसी भी तरह के अति सुगंधित पुष्पों से मां दुर्गा की आराधना करके अपने मनोरथ पूर्ण करके बुध के साथ-साथ अन्य ग्रहों की अनुकूलता भी पा सकते हैं।

तुला राशि- श्वेत कमल श्वेत, कनेर, गेंदा, गुड़हल, जूही, हरसिंगार, सदाबहार, केवड़ा,बेला चमेली आधी पुष्पों से माँ भगवती की आराधना करके उनकी अनुकूलता और शुक्र की कृपा प्राप्त की जा सकती है।

वृश्चिक राशि- किसी भी प्रजाति के लाल पुष्प, पीले पुष्प, एवं गुलाबी पुष्प से पूजा करके मां दुर्गा की कृपा प्राप्त की जा सकती है लाल कमल से पूजा कर पाएं तो घर परिवार में समृद्धि तो बढ़ेगी ही मंगल की कृपा भी प्राप्त होगी।

धनु राशि- कमल पुष्प, कनेर, गुड़हल, गुलाब, गेंदा, केवडा, और कनेर की सभी प्रजातियां के पुष्पों से माँ का पूजन-अर्चन करके माँ का आशीर्वाद एवं बृहस्पति की भी और अधिक शुभता प्राप्त की जा सकती है।

मकर राशि- नीले पुष्प, कमल, गेंदा, गुलाब, गुड़हल आदि से माँ शक्ति की पूजा-आराधना करके माँ की कृपादृष्टि एवं शनिजनित दुष्प्रभावों से बचते हुए ईष्ट कामयाबी हासिल की जा सकती है।

कुंभ राशि- नीले पुष्प, गेंदा, सभी प्रकार के कमल, गुड़हल, बेला, चमेली, रातरानी, आदि से माँ भगवती की आराधना करके उनकी कृपा और शनिग्रह के दोष से मुक्त होते हुए मनोरथ भी पूर्ण किये जा सकते हैं।

मीन राशि- पीले कनेर की सभी प्रजातियां, सभी प्रकार के कमल, गेंदा, गुलाब, गुड़हल की सभी प्रजातियों से पूजा करके माँ की कृपा प्राप्त करते हुए वृहस्पति जन्य दोषों से भी मुक्त हुआ जा सकता है।

प्रथम शैलपुत्री

नवरात्र पूजन के प्रथम दिन कलश पूजा के साथ ही माँ दुर्गा के पहले स्वरूप ‘शैलपुत्री जी’ का पूजन किया जाता है। इनका पूजन करने से मूलाधार चक्र जागृत होता है और यहां से योगसाधना आरम्भ होती है।

– पूजा फल- माँ शैलपुत्री देवी पार्वती का ही स्वरूप हैं जो सहज भाव से पूजन करने से शीघ्र प्रसन्न हो जाती हैं और भक्तों को मनोवांछित फल प्रदान करती हैं।

– मन विचलित होता हो और आत्मबल में कमी हो तो शैलपुत्री की आराधना करने से लाभ मिलता है।

द्वितीय ब्रह्मचारिणी

माँ दुर्गा की नवशक्तियों का दूसरा स्वरुप ब्रह्मचारिणी का है। साधक दुर्गापूजा के दूसरे दिन अपने मन को स्वाधिष्ठान चक्र में स्थित करते हैं और माँ की कृपा प्राप्त करते हैं।

पूजा फल-

इनकी पूजा से अनंत फल की प्राप्ति एवं तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम जैसे गुणों की वृद्धि होती है। इनकी उपासना से साधक को सर्वत्र सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती है।

लालसाओं से मुक्ति के लिए माँ ब्रह्मचारिणी का ध्यान लगाना अच्छा होता है।

तृतीय चंद्रघंटा

नवरात्र के तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा की उपासना की जाती है एवं इस दिन साधक का मन ‘मणिपुर चक्र’ में प्रविष्ट होता है।

पूजा फल-

– इनकी आराधना से साधकों को चिरायु,आरोग्य,सुखी और संपन्न होने का वरदान प्राप्त होता है तथा स्वर में दिव्य,अलौकिक माधुर्य का समावेश हो जाता है। प्रेत-बाधादि से ये अपने भक्तों की रक्षा करती है।

– क्रोधी,छोटी-छोटी बातों से विचलित हो जाने और तनाव लेने वाले तथा पित्त प्रकृति के लोग मां चंद्रघंटा की भक्ति करें।

चतुर्थ कूष्माण्डा

नवरात्र के चौथे दिन साधक अपने मन को माँ के चरणों में लगाकर अदाहत चक्र में स्थित करते हैं।

पूजा फल

– देवी कूष्मांडा अपने भक्तों को रोग,शोक और विनाश से मुक्त करके आयु,यश,बल और बुद्धि प्रदान करती हैं।

– यदि प्रयासों के बावजूद भी मनोनुकूल परिणाम न मिलता हो,तो कूष्मांडा स्वरुप की पूजा से मनोवांछित फल प्राप्त होने लगते हैं।

पंचम स्कंदमाता 

इस दिन साधक का मन ‘विशुद्ध चक्र’ में स्थित होता है।

पूजा फल-

– स्कंदमाता की साधना से साधकों को आरोग्य,बुद्धिमता तथा ज्ञान की प्राप्ति होती है।

– विद्या प्राप्ति,अध्ययन,मंत्र एवं साधना की सिद्धि के लिए माँ स्कंदमाता का ध्यान करना चाहिए।

नवरात्रि के अवसर पर माता वैष्णों को चढ़ाएं भेंट, प्रसाद पूरी से होगी हर मुराद

षष्टम कात्यायनी

नवरात्रि के छटे दिन साधक का मन ‘आज्ञा चक्र’ में स्थित होता है।

पूजा फल

– देवी भागवत पुराण के अनुसार देवी के इस स्वरुप की पूजा करने से शरीर कांतिमान हो जाता है। इनकी आराधना से गृहस्थ जीवन सुखमय रहता है ।

– जिनके विवाह में बिलंब हो रहा हो या जिनका वैवाहिक जीवन सुखी नहीं है वे जातक विशेष रूप से माँ कात्यायनी की उपासना करें,लाभ होगा।

सप्तम कालरात्रि

दुर्गापूजा के सातवें दिन साधक का मन ‘सहस्त्रार चक्र’ में स्थित रहता हैं।

पूजा फल

– ये देवी अपने उपासकों को अकाल मृत्यु से भी बचाती हैं। इनके नाम के उच्चारण मात्र से ही भूत,प्रेत,राक्षस और सभी नकारात्मक शक्तियां दूर भागती हैं। माँ कालरात्रि की पूजा से ग्रह-बाधा भी दूर होती हैं ।

– सभी व्याधियों और शत्रुओं से छुटकारा पाने के लिए माँ कालरात्रि की आराधना विशेष फलदायी है।

अष्टम महागौरी

 नवरात्रि के आठवें दिन माँ अन्नपूर्णा यानि महागौरी की पूजा की जाती है

पूजा फल

– इनकी पूजा से धन,वैभव और सुख-शांति की प्राप्ति होती हैं। उपासक सभी प्रकार से पवित्र और अक्षय पुण्यों का अधिकारी हो जाता है।

– धन-धान्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति के लिए महागौरी उपासना की जानी चाहिए।

नवम सिद्धिदात्री-

इनकी उपासना से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। भक्त इनकी पूजा से यश,बल और धन की प्राप्ति करते हैं।

पूजा फल-  समाज में ख्याति प्राप्त करने कि लिए माँ सिद्धिदात्री की उपासना विशेष फलदायी है।

नवरात्रि का प्रत्येक दिन देवी माँ के विशिष्ठ रूप को समर्पित होता है और हर स्वरुप की उपासना करने से अलग-अलग प्रकार के मनोरथ पूर्ण होते हैं।

मां शैलपुत्री

यह देवी दुर्गा के नौ रूपों में से प्रथम रूप है। मां शैलपुत्री चंद्रमा को दर्शाती हैं और इनकी पूजा से चंद्रमा से संबंधित दोष समाप्त हो जाते हैं।

मां ब्रह्मचारिणी

ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार देवी ब्रह्मचारिणी मंगल ग्रह को नियंत्रित करती हैं। देवी की पूजा से मंगल ग्रह के बुरे प्रभाव कम होते हैं।

मां चंद्रघंटा

 देवी चंद्रघण्टा शुक्र ग्रह को नियंत्रित करती हैं। देवी की पूजा से शुक्र ग्रह के बुरे प्रभाव कम होते हैं।

मां कूष्मांडा

मां कूष्माण्डा सूर्य का मार्गदर्शन करती हैं अतः इनकी पूजा से सूर्य के कुप्रभावों से बचा जा सकता है।

मां स्कंदमाता

देवी स्कंदमाता बुध ग्रह को नियंत्रित करती हैं। देवी की पूजा से बुध ग्रह के बुरे प्रभाव कम होते हैं।

मां कात्यायनी

देवी कात्यायनी बृहस्पति ग्रह को नियंत्रित करती हैं। देवी की पूजा से बृहस्पति के बुरे प्रभाव कम होते हैं।

मां कालरात्रि

देवी कालरात्रि शनि ग्रह को नियंत्रित करती हैं। देवी की पूजा से शनि के बुरे प्रभाव कम होते हैं।

मां महागौरी

देवी महागौरी राहु ग्रह को नियंत्रित करती हैं। देवी की पूजा से राहु के बुरे प्रभाव कम होते हैं।

मां सिद्धिदात्री

देवी सिद्धिदात्री केतु ग्रह को नियंत्रित करती हैं। देवी की पूजा से केतु के बुरे प्रभाव कम होते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *