Sat. Jan 25th, 2020

नशे की चपेट में युवा पीढी

1 min read

देहरादून। नशे को लेकर कहा जाता है कि पंजाब में सबसे ज्यादा नशा है। वहां की युवा पीढी नशे में अपनी जवानी को मिटाने पर अमादा है। पंजाब मे नशे के पंजे कितनी जडे जमा चुके हैं इसका अंदाजा इसी बात से हो जाता है कि फिल्मी दुनिया में पंजाब छाया हुआ है। जिसके कारण उडता पंजाब नाम से एक फिल्मी भी आ चुकी है। इस फिल्म के शुरू से लेकर अंतिम दृश्य तक नशे को लेकर जो सच्चाई बयां की गयी वह वाकई में दुखद है। जिस तरह से पंजाब नशे में चुर हो रहा है उसी तरह अब उत्तराखण्ड में भी नशे का कारोबार पनप चुका है जो अंदर ही अंदर उत्तराखण्ड को खोखला कर रहा है। युवा कितना नशा कर रहे हैं इसका कोई मानक तो नही है लेकिन इतना जरूर है कि नशे की लत मैदानी क्षेत्रो के साथ-साथ पहाड तक मे फैल चुकी है। उत्तरकाशी, रूद्रप्रयाग, चमोली, पिथौरागढ, बागेश्वर, अल्मोडा, चंपावत, उधमसिंहनगर, नैनीताल, पौडी, हरिद्वार, देहरादून, टिहरी ऐसा कोई क्षेत्र नही जहां नशा न पनपा हो। रूद्रप्रयाग को छोडकर अन्य स्थानों पर नशे को परोसने वाले दर्जनो की संख्या में गिरफ्तार भी हो चुके हैं। राज्य में 10 करोड 42 लाख से ज्यादा के मादक पदार्थो की बरामदगी पुलिस द्वारा पिछले साल की गयी। वर्ष 2019 में अकेले राजधानी दून में 513 नशे के सौदागर गिरफ्तार हुए हैं जिनसे 5.49 करोड के मादक पदार्थ बरामद हुए हैं। गिरफ्तारी के मामले में नम्बर 2 पर उधमसिंहनगर है, जहां 262 आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर उनके पास से 57.18 लाख का मादक पदार्थ बरामद किया गया है। उत्तराखण्ड राज्य वही प्रदेश है जिसे मातृ शक्ति के आंदोलन की बदौलत प्राप्त किया गया था। मातृ शक्ति उत्तराखण्ड को नशे से मुक्त करने के लिए संघर्ष करती रही लेकिन जिम्मेदारो ने कभी इस ओर ध्यान नही दिया। जब बिहार जैसा राज्य अपने यहां शराब बंदी कर सकता है तो उत्तराखण्ड क्यों नही। लेकिन राज्य सरकार राजस्व वसूली के चक्कर में शराब पर पाबंदी नही लगाती। दशको से शराब बंदी के लिए महिलाएं आंदोलन चलाती रही पर सब बेकार गया। नतीजा वही ढाक के तीन पात। देहरादून हो या हल्द्वानी आज भी ठेको की वजह से घर उजड रहे हैं। आज के दौर में भी जहरीले शराब से मौतो की खबर आती है। दून में ही एक हदयविदारक घटना हुयी थी। जहरीली शराब के कारण अनमोल जिंदगियां खत्म हुयी थी। हालांकि पुलिस ने इस मामले में कई गिरफ्तारियां भी की हैं। केवल गिरफ्तारियो से काम नही चलता। यदि वास्तव में कुछ करना है तो सबसे पहला कदम शराब बंदी का है। यदि सरकार बिहार से कुछ सीखे तो उसकी तरह उत्तराखण्ड में शराब बंदी लागू कर दे। ताकि कुछ हद तक युवाओं को नशे की गर्त में जाने से रोका जा सके। वैसे सच्चाई तो यह भी है कि पुलिस महकमा नशे के कारोबार पर लगाम कसने के लिए कार्यवाही करता है लेकिन तमाम कार्यवाहियो के बावजूद नशे के सौदागर उत्तराखण्ड ही नही उत्तर प्रदेश के बरेली, शाहाजहांपुर, मुरादाबाद, हिमाचल प्रदेश और पंजाब आदि हिस्सो से नशे की सामग्री की तस्करी उत्तराखण्ड में करके युवाओ की रगो में जहर घोलने में लगे हुए हंै। पंजाब के बाद उत्तराखण्ड ड्रग्स को लेकर सुर्खियो में है। नशा नेटवर्क से जुडे लोगो की जड अब इतनी गहरी हो चुकी है कि इनका कारोबार अब करोडो में पहुंच गया है। नशे का सबसे बडा शिकार शिक्षित वर्ग है। इनमें युवाओ की संख्या सबसे ज्यादा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *