Tue. Feb 25th, 2020

धाद ने जारी किया 2020 का केलेंडर

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देहरादून। धाद ने सार्वजनिक शिक्षा के संकट और  चुनौतियो के पक्ष में आम समाज और शाशन का ध्यान आकृष्ट करते हुए 2020 का केलेंडर जारी किया। केलेंडर को धाद की ओर से गणेश उनियाल साकेत रावत और विनोद ने जारी किया। केलेंडर जारी करते हुए धाद के सचिव तन्मय ने बताया कि उत्तराखंड की सार्वजनिक शिक्षा जो की पर्वतीय क्षेत्र की शिक्षा का आधार है वो आज सबसे चुनौती पूर्ण दौर से गुजर रही है। गत दो दशकों में पहाड़ों से पलायन तीव्र हुआ है जिसके चलते स्कूलों के अस्तित्व पर संकट गहराया है घटती संख्या के चलते स्कूल बंद हो रहे है जिसका कुप्रभाव अन्य निकटस्थ स्कूलों पर हो रहा है। 1911 में स्थापित खल्ला मंडल चमोली के प्राथमिक विच्यालय का हवाला देते हुए बताया गया की आज भी पहाड़ी क्षेत्र में शिक्षा का आधार सार्वजनिक यानि सरकारी शिक्षा है जो पहाड़ के भविष्य के नागरिक पैदा कर रही है। बीत वर्षों में तमाम नीतिगत कारणों से और सामाजिक उपेक्षा के चलते  ये कमजोर हुई है। धाद इसमें शासन के साथ समाज की सक्रीय हिस्सेदारी के निमित्त अपना अभियान मेरे गाँव का स्कूल प्रारंभ किया है। बाल सरोकार एकांश के संयोजक गणेश उनियाल ने बताया कि अभियान के अंतर्गत उत्तराखंड के सभी लोगों से अपने गाँव के स्कूल के पक्ष में खड़ा होते हुए उसे बेहतर बनाने का प्रयास किया  जाता है। आम समाज के सहयोग पर आधारित यह अभियान पिछले दो वर्षो में 350 स्कूलों तक पहुंचा है। इसमें एक व्यक्ति के सहयोग से 100 रुपये के मासिक योगदान से स्कूल में एक किताबों का कोना बनाया जाता है। धाद इसे तीव्र करते हुए 1000 स्कूलों के लक्ष्य के साथ वर्ष 2020 में इस अभियान को प्रारभ कर रही है। शैक्षिक एकांश के अध्यक्ष राजीव पांथरी ने बताया की उत्तराखंड के बाल पर्व फुल्देयी की पहल को भी सामने रखा गया है मार्च के महीने में आयोजित पर्व में बच्चे विभिन रचनात्मक विधाओं लेखन पेंटिंग थिएटर में प्रतिभाग करते हैं। धाद के संयुक्त सचिव विकास बहुगुणा ने बताया कि हरेला की पहल धाद ने 2010 में की थी तब से है वर्ष विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच इसका आयोजन किया जाता है और उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र में कृषि और उत्पादकता के क्षेत्र में श्रेष्ठ कार्य के लिए जसोदा नवानी हरेला सम्मान दिया जाता है। धाद के उपाध्यक्ष विजय जुयाल ने बताया कि उत्तराखंड के आपदा प्रभावित परिवारों के बच्चों की शिक्षा के लिए अपनी पहल को सामने रखते हुए कहा की केदारनाथ आपदा के पश्चात धाद और फ्रेइड्स ऑफ हिमालय ने पुनुरुथान कार्यक्रम प्रारम किया था। जिसके अंतर्गत उनकी शिक्षा को जारी रखने के लिए सहयोग किया गया जो आज भी जारी है। इगास जो उत्तराखंड का उजास पर्व है को आपदा के बरअक्स उजाले के पर्व के रूप में धाद प्रतिवर्ष आयोजित करती है। धाद के अध्यश लोकेश नवानी ने कहा की धाद की सक्रियता उम्मीद जगाती है सामाजिक विश्वसनीयता के साथ समाज को जोड़ते हुए धाद की यात्रा जारी है। उत्तराखंड की लोकभाषाओं से प्रारभ हुई यात्रा आज उसके विभिन्न प्रश्नों पर काम कर रही है। इस अवसर पर लोकेश नवानी, गणेश उनियाल, हर्ष्मानी व्याश, विजय जुयाल, किशन सिंह, मीनाक्षी जुयाल, मनीषा ममगाईं, प्रीती तोमर, पूनम नैथानी, मंजू काला, कल्पना बहुगुणा, राजेश्वरी सेमवाल, शांति बिंजोला, हरीश कंडवाल, विपिन सिंह, राजीव पांथरी, विकाश बहुगुणा, अमित थालेदी, मनिल कंडवाल, सुदीप जुगरान, अनुभ्रत नवानी, धरम सिंह, सुधांशु चौधरी, बबिता वर्मा, प्रभाकर देवरानी, तन्मय ममगाईं, रविन्द्र नेगी, बीना कंडारी, नीलम, प्रभा वर्मा, सुमित्रा जुगरान, साकेत रावत, विनोद आदि उपस्थित थे।

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