Wed. Nov 13th, 2019

गंगा तट पर पहुंचे प्रवासी पक्षी, बढ़ी रौनक

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हरिद्वार : हरिद्वार के गंगा घाटों पर मध्य एशिया, मंगोलिया, चीन, साइबेरिया, रूस के प्रवासी पक्षी पहुंच गए हैं। इससे गंगातट पर रौनक बढ़ गई है। पक्षी विशेषज्ञ का मानना है कि इस महीने के अंत तक मानसरोवर झील से यहां आने वाले प्रवासी पक्षी राजहंस का दीदार भी स्थानीय लोगों को हो सकेगा।गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के कुलसचिव व अंतरराष्ट्रीय पक्षी वैज्ञानिक प्रो. दिनेश भट्ट ने बताया कि प्रवासी पक्षियों की कुछ प्रजाति जैसे सुर्खाब, जल काग, ब्लैकविग इसटिल्ट, रीवर लैपविग, स्पॉटबिल्ड़ डक, वैगटेल अर्थात सुंदर नेत्रों वाली खंजन, सैंड पाइपर, रीवर टर्न, रेड़नेप्पड़ आइबिस के समूह हरिद्वार के गंगा तटों पर पहुंच चुके हैं। टील्स व मैलार्ड का समूह जल्द पहुंचेगा। उन्होंने बताया कि मानसरोवर झील से राजहंस उड़ान भर चुके हैं। नवंबर के अंत तक इसका दीदार हरिद्वार में गंगा तटों पर हो सकेगा। उन्होंने बताया कि पक्षी भी अपने भौगोलिक क्षेत्र या अपने प्रजनन स्थानों जैसे साइबेरिया, रूस, कजाकिस्तान, चीन से दीपावली के आसपास भारत में शीत ऋतु में धूप सेंकने और ताल तलैया में क्रीड़ा करने पहुंच जाते हैं। वसंत ऋतु में तापमान बढ़ने के साथ ही अपने देश के लिए उड़ान भरना शुरू कर देते हैं। इनकी उड़ान किसी विमान की तरह होती है। भारतीय उपमहाद्वीप में पहुंचने वाले पक्षी सेंट्रल एशियन फ्लाईवे का प्रयोग करते हैं।भोजन के लिए पक्षी हरिद्वार पहुंचने से पूर्व कुछ भौगोलिक क्षेत्रों में लैंड करते हैं। गंगा घाटी, भरतपुर, केवलादेव नेशनल पार्क, चिल्का झील, लोकटक झील प्रवासी पक्षियों के लिए अनुकूल माना जाता है। कुछ भौगोलिक क्षेत्रों में हंटिग, युद्ध, बाढ़, प्राकृतिक आपदा में हजारों पक्षी प्रतिवर्ष मर जाते हैं। यही वजह है कि अफगानिस्तान में लगातार कई वर्ष युद्ध होने से साइबेरियन क्रेन विलुप्त हो गई। यह क्रेन पक्षी अफगानिस्तान पाकिस्तान के रास्ते ही भारत पहुंचता था।

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