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प्रधानमंत्री से लेकर सांसद तक कर रहे सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग

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देहरादून, 22 अक्टूबर। देश के प्रधानमंत्री हर रोज भारत को मजबूत बनाने से लेकर साफ स्वच्छ पर्यावरण देने के लिए नये नये उपाय खोज रहे हैं। स्वच्छता अभियान से लेकर सिंगल यूज प्लास्टिक पर बैन लगाने तक पर विचार करने वाली मोदी सरकार ने विगत दो अक्टूबर को सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूरी तरह से रोक लगाने का निर्णय लिया था लेकिन न जाने क्या कारण रहे कि इस रोक पर फैसला नही लिया जा सका। इतना जरूर हुआ कि सरकार ने फिलहाल इसके खिलाफ अभियान के जरिए लोगो में जागरूकता फैलाने का प्रयास शुरू कर दिया। वैसे कई राज्य सिंगल यूज प्लास्टिक को बैन करने की फेबर में भी दिखायी दिए। उत्तराखण्ड राज्य इनमें से एक है। राज्य सरकार के मुखिया ने तो एक बैठक में मिनरल वाटर की बोतलो के स्थान पर कॉपर की बोतलो में पानी तक पिया था। जब त्रिवेंद्र सरकार ने कॉपर की बोतल का इस्तेमाल करना शुरू किया तो यह उम्मीद जगी थी कि शायद अब जन जागरूकता को धरातल पर उतारा जा सकता है लेकिन नतीजे ठाक के तीन पात रहे। आज भी बाजारो में मिनरल वाटर की बोतलो को आसानी से देखा जा सकता है। सिंगल यूज प्लास्टिक का जमकर उपयोग हो रहा है। छोटे बाजारो से लेकर मॉल तक में प्लास्टिक की पन्नियों में खरीदारी हो रही है। सिंगल यूज प्लास्टिक यदि किसी के लिए बैन हो रहा है तो वह केवल ठेली फड वाले हैं। जिन्हें चालान के नाम से डराया धमकाया जा रहा है। इसका नतीजा यह निकला कि ठेली पर बिकने वाली फल सब्जी कागज के लिफाफो में दी जा रही है लेकिन जिन जन प्रतिनिधियों के कंधों पर सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ जन जागरूकता फैलाने का जिम्मा था वही डिस्पोजल में खाने का स्वाद ले रहे हैं। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक तरफ सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ जन जागरूकता फैलाने का प्रयास करते हुए सुबह की सैर के दौरान समुद्र के किनारे पानी की बोतले एकत्र करते हुए दिखायी देते हैं तो वही वह यह भी भूल जाते हैं कि वह जिस प्लास्टिक की पन्नी में इन बोतलों को अति उत्साह में एकत्र कर रहे हैं वह सिंगल यूज प्लास्टिक में ही आता है और वह इसी प्लास्टिक को बंद करने की बात कर रहे हैं। कई बार अति उत्साह अपने पर ही भारी पड जाता है। जो प्रधानमंत्री एक मंुह से सिंगल यूज प्लास्टिक बैन करने की बात कह रहे हैं तो वही दूसरी तरफ स्वयं उसका उपयोग कर रहे है। यह तो वही बात हुयी कि प्रवचन हमेशा गरीबो के लिए होता है जो कानून बनाता है उस पर कानून लागू नही होता और जिन पर यह कानून लागू होना चाहिए वह उसे अपनी जेब में रखते है। कानून का पालन केवल आम के लिए होता है। खास तो उसे ताक पर रखने मे भी गुरेज नही करते।

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