Wed. Nov 13th, 2019

आखिर किस करवट बैठेगी हरीश रावत की राजनीति

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देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत इन दिनों स्टिंग के एक मामले में घिरे हुए हैं। वर्ष 2016 में यह स्टिंग हुआ था। स्टिंग का जीन ऐसे रावत के पीछे लगा कि आज तक उन्हें उससे छुटकारा नही मिला है। मामला फिलहाल उच्च न्यायालय नैनीताल में विचाराधीन है। माननीय न्यायालय ने इस मामले की सुनवाई की अगली तिथि 1 नवम्बर निहित की है। फिलहाल सीबीआई मामले में एफआईआर दर्ज करने की ओर अपने कदम बढा रही है। यदि सीबीआई हरीश रावत के खिलाफ मुकदमा  दर्ज करती है तो निश्चित रूप से हरीश रावत की राजनीतिक पैठ को झटका लगेगा। वैसे हरीश रावत की जब सत्ता हिली थी तभी से उनके राजनीतिक पैठ पर प्रश्न चिन्ह लगने शुरू हो गए थे। हालांकि उन्होंने अपने विधायकों के बागी होने के बावजूद सरकार को मंडरा रहा खतरा टाल दिया था और पुनः सीएम की कुर्सी हासिल कर ली थी। यदि बुरे वक्त के समय उनका कोई स्टिंग न होता तो आज कांग्रेस के लिए हरीश रावत हीरो होते क्योंकि राजनीति की लम्बी पारी खेलने वाले हरीश रावत के एक दो नही बल्कि 9 विधायकों ने एक ही तारीख में बगावत कर दी थी बाद में रावत सरकार से और विधायक भी अलग हो गए थे। हरीश रावत जिन विधायकों पर सबसे ज्यादा भरोसा करते थे उन्होने ही पाला बदल लिया था। वर्ष 2016 पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा और हरक सिंह रावत के नेतृत्व में 9 कांग्रेसी विधायकों ने हरीश रावत के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंका था। इसके बाद केंद्र सरकार ने हरीश रावत सरकार को बर्खास्त कर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया था। हरीश रावत हाईकोर्ट गए थे जहां से उनकी सरकार बहाल हुयी थी। इस दौरान उत्तर प्रदेश और उत्तराखण्ड के एक निजी चैनल के मालिक ने हरीश रावत का स्टिंग किया था जिसमें हरीश रावत विधायकों की खरीद फरोख्त की बात करते दिखायी दिए थे। इसी स्टिंग के आधार पर तत्कालीन राज्यपाल ने राष्ट्रपति शासन के दौरान 31 मार्च 2016 को सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। जिसके बाद 2 अप्रैल को ही केंद्र ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी। सरकार बहाल होने के बाद हरीश रावत ने इस केस की जांच सीबीआई के बजाए एसआईटी से करवाने की सिफारिश की थी लेकिन यह मामला सीबीआई के पास ही रहा। इसके बाद हरीश रावत गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट की शरण में चले गए थे। हाईकोर्ट ने सीबीआई को आदेश दिया था कि कोई भी कार्यवाही करने से पहले वह कोर्ट की अनुमति ले। 3 सितम्बर सीबीआई ने हाईकोर्ट को यह जानकारी दी थी कि उसने इस केस की जांच पुरी कर ली है और वह जल्द ही इस मामले में एफआईआर दर्ज करना चाहती है। अब राजनीतिक हलको में यह चर्चा है कि यदि सीबीआई हरीश रावत पर स्टिंग मामले में केस दर्ज करती है तो हरीश रावत का राजनीतिक भविष्य क्या होगा? क्योंकि कांगे्रस में जिस तरह गुटबाजी है उससे तो हरीश रावत की मुश्किले बढती हुयी दिखायी दे रही है। बेशक आज कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह हरीश रावत के साथ कदम ताल करते हुए दिखायी दे रहे हैं लेकिन जब बुरा वक्त आता है तो अपनी परछाई भी इंसान का साथ छोड देती है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजनीतिक चाल के तहत ही हरीश रावत के साथ खडे होने की बात कह रहे हैं लेकिन हर कोई जानता है कि जब हरीश रावत सरकार पर 2016 में बुरा वक्त आया था तो तत्कालीन कांग्र्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने हरीश रावत की परछाई बनकर पूरे संगठन को साथ लेकर उनकी सरकार को बचाने का सफल प्रयास किया था और जैसे ही हरीश रावत के हाथ दोबारा सत्ता की कमान आयी उन्होने सबसे पहले परछाई को ही दूर करने का प्रयास किया था। अब मामला एक दम पलटा हुआ है। बुरा वक्त हरीश रावत का इंतजार कर रहा है और संगठन के प्रदेश अध्यक्ष उनका साथ देने की घोषणा कर रहे हैं। कही ऐसा न हो कि इतिहास अपने को दोबारा दोहराए और प्रदेश अध्यक्ष का बयान राजनीतिक बयान न बनकर रह जाए। बहराल कौन किसका कितना साथ देता है यह तो आने वाला वक्त ही बतायेगा। आज केवल इतना कहा जा सकता है कि यदि सीबीआई हरीश रावत पर मुकदमा दर्ज कर लेती है तो रावत का राजनैतिक कैरियर पर अनेक सवालिया निशान खडे हो जाएंगे। यह भी संभव है कि केस दर्ज होने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत को जेल यात्रा न करनी पडी। कहते हैं कि मां सरस्वती एक बार व्यक्ति की जीहवा पर बैठती है और पिछले कुछ समय पहले हरीश रावत बार-बार यही बयान दे रहे थे कि केंद्र सरकार सीबीआई को मोहरा बनाकर उन्हें जेल भेजना चाहती है। आज हालात उनकी जेल यात्रा के बन चुके हैं।

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