Wed. Nov 13th, 2019

नये मोटरयान अधिनियम से खौफ का माहौल

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देहरादून। केंद्र सरकार देश से गरीबी नही बल्कि गरीबों को मिटाने पर तुली हुयी है। अभी हाल ही में नये मोटरयान अधिनियम को लागू किया गया। इस  नियम में जो संशोधन किया गया उसके हिसाब से यदि किसी ने भी यातायात नियम का अंश भर भी उल्लंघन किया तो उसकी जेब पर ऐसा बोझ बढेगा कि वह कई सालों तक केंद्र सरकार को याद रखेगा। हालांकि गोवा सरकार ने संशोधित मोटरयान अधिनियम को अपने यहां लागू करने से इंकार कर दिया है। गोवा सरकार का मानना है कि जब तक वह गढ्ढा मुक्त सडक आम जन को मुहैया नही करायेगी तब तक वह संशोधित नियम को अपने यहां लागू नही करेगी। ऐसी सरकार देश के अन्य राज्यों में भी होनी चाहिए। गोवा सरकार की तरह हैदराबाद सरकार भी अन्य राज्यो के लिए नजीर बनती हुयी नजर आ रही है क्योंकि वहां की सरकार ने इंश्योरेंस, लाईसेंस व प्रदूषण जांच के लिए पुलिस को चालान काटने की छूट नही दी बल्कि कुछ प्रमुख चैराहों पर इंश्योरेंस, प्रदूषण जांच व आरटीओ कार्यालय के अधिकारियों को लाईसंेस बनाने के लिए बैठा दिया है। पुलिस यातायात नियम का उल्लंघन करने वालो की जांच तो करेगी लेकिन यदि किसी के पास पेपर की कमी होगी तो वह हाथ के हाथ मौके पर ही पूरा करा दिया जाएगा। जो सरकारें आम जन के बीच हीरो बन चुकी हैं उनसे उत्तराखण्ड सरकार को कुछ सबक सिखने की आवश्यकता है। क्योंकि यहां आम जन की कमर पहले ही डेंगू ने तोड रखी है ऊपर से नये मोटरयान अधिनियम ने आम जन के पसीने छुडा दिए है। एक तरफ डाक्टर, पैथोलॉजी लैब के बाहर लाईने लग रही है तो प्रदूषण जांच केंद्र के बाहर वाहन का प्लयूशन चैक कराने के लिए पसीने बहाने पड रहे हैं। रात को दो-दो बजे प्रदूषण जांच केंद्र के बाहर वाहनो की कतार लग रही है। इस कतार को देखकर नोट बंदी के दिन याद आने लगे है। जब मोदी सरकार ने नोट बंदी की थी उस समय बैंको के बाहर ऐसी ही लाईने देखने को मिलती थी। संभागीय परिवहन कार्यालय के तो कहने ही क्या। इस कार्यालय में पहले लोग दलालो से परेशान हुआ करते थे लेकिन अब विभाग की लचर कार्यशैली वाहन चालको के लिए परेशानी का सबक बन चुकी है। कारण यह है कि जिन लोगो को अपना ड्राइविंग लाईंसेंस बनाना है या फिर लाईसेंस का नवीनीकरण कराना है तो उसे फरवरी तक का इंतजार करना पड रहा है। फरवरी तक आरटीओ टेस्ट की डेट प्रदान नही कर रहा। अब सबसे बडा सवाल यह खडा हो रहा है कि उत्तराखण्ड राज्य में आज से संशोधित दरे लागू हो चुकी हैं। केवल प्रदूषण के मामले मे चालान काटने की बात नवम्बर तक कही जा रही है। नवम्बर माह के उपरांत आरटीओ व पुलिस विभाग प्रदूषण की जांच करेगा। तब तक वाहन चालको को राहत दी गयी है कि वह अपने वाहन की प्रदूषण जांच कराकर प्रदूषण जांच सेटिफिकेट प्राप्त कर लें। आज से आरटीओ सहित पुलिस विभाग वाहनो की जांच का अभियान शुरू कर चुका है। आम जन संशोधित दरो को लेकर खासे गुस्से में हैं क्योंकि उत्तराखण्ड भाजपा सरकार डेंगू सहित विभिन्न मामलों में फेल साबित हुयी है। वाहन चालक सरकार से एक ही सवाल पूछ रहे हैं कि वह लोग क्या कोई अपराधी हैं क्योंकि सार्वजनिक स्थानांे व चैराहो पर पुलिस वाहन चालको से जैसी बदतमिजी करती है उसे देखकर तो यह ही लगता है कि वाहन चालक किसी अपराधी से कम नही है। हालांकि खाकी वर्दी वाले खुद दर्जनो बार बिना हेलमेट दुपहिया वाहन को दौडाते हुए नजर आ जाते हैं। प्रदूषण जांच केंद्र, आरटीओ कार्यालय में कही भी खाकी वर्दी वाले दूर-दूर तक अपने वाहनो के साथ खडे दिखायी नहीं देते। बात केवल पुलिस विभाग की नही है सरकारी कार्यालयों मे जो चैपहिया वाहन दौड रहे हैं उनके पास भी प्रदूषण जांच सेटीफिकेट नही है। जब प्रदेश की जनता डेंगू से खासी पीडित है ऐसे मे संशोधित नियम को कुछ समय के लिए टाला जा सकता था किंतु त्रिवेंद्र सरकार ने ऐसा कुछ नहीं किया। देश के पीएम को खुश करने के चक्कर मंे उत्तराखण्ड सरकार ने आम जन की कमर तोडने का काम किया है।

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