Wed. Nov 13th, 2019

जनता कुछ नही भूलती साहब

1 min read

देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य देवो की नगरी है जिस धरती पर देवी-देवताओं ने घोर तपस्या की। आज वो ही धरती जहरीली शराब से अपवित्र हो रही है। जहरीली शराब दर्जनो लोगो को अपना शिकार बना चुकी है। एक राज्य में दो-दो बार जहरीली शराब से निदोष लोगो की जाने गयी लेकिन सरकार आंखो ंपर पट्टी बांधे सब कुछ देखती रही। आज एक बार फिर सात जाने जहरीली शराब का शिकार हुयी। तज्जुब की बात तो यह रही कि जिस स्थान पर जहरीली शराब का खेल खिल रहा था उसके पास ही भाजपा के विधायक का निवास भी है। भाजपा के विधायक गणेश जोशी शराब कांड के बाद मृतक लोगो के घर भी गये थे लेकिन सत्तारूढ पार्टी के विधायक भी उन शराब माफियाओं को जेल की सलाखो के पीछे नहीं पहुंचवा पाये जो जहरीली शराब का कारोबार कर रहे थे। पीडित पक्षो के अनुसार पथरिया पीर में जहरीली शराब का कारोबार नयी बात नही है यहां पहले से शराब का अवैध कारोबार संचालित है। सबसे बडी बात तो यह है कि इस कारोबार के पीछे जिस व्यक्ति का नाम आ रहा है वह सत्तारूढ भाजपा का ही एक पदाधिकारी है इसके गिरेबान तक अभी पुलिस के हाथ नही पहुंचे हैं। पुलिस विभाग भी अवैध शराब के कारोबार को करने वाले सत्तारूढ पार्टी के नेता को बचाने में लगी हुयी है। सात लोगो की मौत भी न ही सरकार की नींद तोड सकी और न ही आबकारी व पुलिस विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को उनकी जिम्मेदारी का एहसास करा पायी। चाहे आबकारी विभाग हो या फिर पुलिस विभाग। दोनो ही विभागो के आलाअधिकारियो ने अपने चंद कर्मचारियों पर निलंबन की गाज गिराकर अपना पल्ला साफ करने का प्रयास किया लेकिन बात यही खतम नही होती। पल्ले पर जो दाग लगे हैं वह इतनी आसानी से मिटने वाले नही है। इन दागो के पीछे उन परिवारो की सिसकने की आवाजे हमेशा सुनायी देगी जो अब अपने सात लोगो को खो चुके है। मृतको मंे एक 23 साल का युवक भी शामिल है। इस युवक के परिवार का आज जो बुरा हाल है वह पत्थर दिलो को भी रूला देगा। आखिर अवैध शराब के कारोबार पर भाजपा सरकार नियंत्रण क्यों नही कस पा रही इसका जवाब  न ही सत्तारूढ पार्टी के पास है और न ही जिम्मेदार अधिकारियो के पास। अवैध शराब के खेल मंे भाजपा नेता का शामिल होना ही अपने आप कई सवालो का जवाब है। ‘‘जब सैय्या भए कोतवाल तो डर काहे का’’ यह कहावत हजार सवाल के जवाब को अपने मे छिपाए हुए है। सबसे बडा ताज्जुब तो यह है कि उत्तराखण्ड राज्य के ही रूडकी में हुए शराब कांड से भी सरकार ने कोई सबक नही सिखा। आठ फरवरी 2019 को जहरीली शराब पीने से उत्तराखण्ड के बडू खडक, बाल्लूपुर, नन्हेडा अनंतपुर, जहाजगढ, लाठरदेवा, साबतवाली, चुडियाल समेत करीब 10 गांवो के 47 लोगो की मौत हो गयी थी। एक के बाद एक मौत से राज्य में हडकंप मच गया था। इतना ही नही 10 लोगो के आंखो की रोशनी भी जहरीली शराब ने छिन ली थी। उत्तराखण्ड के अलावा उत्तर प्रदेश में भी जहरीली शराब पीने से करीब 100 लोगो की जान चली गयी थी। इतनी मौत होने के बाद ही दोनो राज्यो के अधिकारी हरकत में आए थे इसके बाद आनन फानन में 13 आरोपितो की गिरफ्तारी हुयी थी। कही जगह छापे मार गए लेकिन समय बीतने के साथ ही यह सख्ती गुजरे जमाने की बात हो गयी। पुलिस व आबकारी विभाग के सुस्त होते ही शराब माफिया एक बार फिर नकली शराब के कारोबार में लिप्त हो गए और पुलिस सहित जिम्मेदार अधिकारियो की सुस्ती का परिणाम पथरिया पीर मे देखने को मिला जहां सात जाने तो चली गयी लेकिन राज्य सरकार की सुस्ती एक बार फिर किसी नई घटना का इंतजार करा रही है। सूबे के मुखिया आखिर कब अपनी चिर निद्रा से बाहर आयेंगे इसका जवाब आने वाला वक्त ही देगा। फिलहाल तो इंतजार इस घडी का है कि जहरीली शराब का कारोबार करने वाले मुख्य आरोपी किस घडी में जेल की सलाखो के पीछे होगे। यह भी हो सकता है कि सत्तारूढ पार्टी अपने उस नेता को बचा ले जाए जिसका नाम शराब कांड मे उछल रहा है। अभी तक पुलिस इस मामले मंे एक आरोपी की गिरफ्तारी ही कर पायी है। जो आरोपी गिरफ्तार हुआ है उसने जनपद के एसएसपी के सामने मीडिया को जो कहानी बतायी वह गले उतरने के लायक नही है। हालांकि उसने भी अपने बयान में यह बोल दिया है कि वह भाजपा के नेता से भी शराब खरीदकर बेचा करता था। 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *